नई दिल्ली। राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब तीखी बयानबाजी तक पहुंच गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उसे 'नई मुस्लिम लीग' तक कह दिया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने पलटवार किया है। इस राजनीतिक विवाद में अब 'टेलीप्रॉम्प्टर' भी चर्चा का विषय बन गया है।
दरअसल, यह विवाद कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के उस फैसले के बाद शुरू हुआ, जिसमें पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के केवल शुरुआती दो छंदों के गायन को जारी रखने की बात कही। कांग्रेस ने इसे 1937 में लिए गए अपने पुराने निर्णय से जोड़ा, जबकि भाजपा ने इसे देशभक्ति और राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
नितिन नवीन ने कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के फैसले पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के कारण राष्ट्रगीत को लेकर ऐसा फैसला लिया है।
नितिन नवीन ने कहा कि कांग्रेस ने अब अपने पुराने रुख को प्रस्ताव का रूप दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने राष्ट्रीय भावनाओं को नजरअंदाज किया है और वोट बैंक के दबाव में काम कर रही है।
उन्होंने कांग्रेस की तुलना 'नई मुस्लिम लीग' से करते हुए कहा कि पार्टी आज उसी दिशा में जा रही है, जहां उसके लिए वोट बैंक देश के सम्मान से ऊपर हो गया है। उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने भाजपा पर हमला तेज कर दिया।
विपक्ष का पलटवार, उठाया 'टेलीप्रॉम्प्टर' मुद्दा
नितिन नवीन के बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने भाजपा को घेरना शुरू कर दिया। विपक्ष का कहना है कि भाजपा राष्ट्रगीत जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक हथियार बना रही है।
विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि देशभक्ति को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। इसी दौरान कुछ नेताओं ने नितिन नवीन के बयान और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाषण शैली को लेकर 'टेलीप्रॉम्प्टर' का मुद्दा भी उठाया।
विपक्ष का तर्क है कि भाजपा को वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए और ऐसे विषयों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
कांग्रेस ने अपने फैसले का किया बचाव
कांग्रेस की ओर से कहा गया कि पार्टी का रुख नया नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि 1937 में पार्टी ने जो निर्णय लिया था, उसी के अनुसार कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंद गाए जाएंगे।
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इतिहास और परंपरा को अपने राजनीतिक नजरिए से पेश कर रही है। पार्टी का कहना है कि वंदे मातरम् के प्रति सम्मान हमेशा रहा है और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
अमित शाह ने भी कांग्रेस पर साधा था निशाना
वंदे मातरम् विवाद पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस पर हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राष्ट्रगीत को लेकर गलत फैसला लिया है और देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है, इसलिए इसके सम्मान से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व
'वंदे मातरम्' भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत रहा है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और आजादी की लड़ाई के दौरान यह लोगों में उत्साह और देशभक्ति की भावना जगाने का माध्यम बना।
1950 में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। हालांकि, समय-समय पर इसके कुछ हिस्सों और सार्वजनिक गायन को लेकर बहस होती रही है।
राजनीतिक मुद्दा क्यों बना?
भारत में राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते रहे हैं। वंदे मातरम् भी ऐसा ही विषय है, जिस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अलग-अलग विचार रहे हैं।
भाजपा इसे राष्ट्रीय गौरव और सम्मान से जोड़ती है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वह ऐतिहासिक निर्णय और परंपरा के अनुसार इसका पालन कर रही है।
बयानबाजी से बढ़ी सियासी गर्मी
नितिन नवीन के 'नई मुस्लिम लीग' वाले बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा जहां कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस भाजपा पर मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रही है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे भारतीय राजनीति में कितने प्रभावशाली हो सकते हैं।
आगे क्या?
वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। दोनों प्रमुख दल अपने-अपने राजनीतिक मंचों से इस मुद्दे को जनता तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
फिलहाल, यह मामला केवल राष्ट्रगीत के गायन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि राजनीतिक विचारधारा और राष्ट्रवाद की बहस का हिस्सा बन चुका है।
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