Delhi कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन ने "उंगली तो उठेगी - रावण दहन" के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश के युवाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों को सुलझाने में विफल रही है। पुतले पर उद्योगपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा नेता दुष्यंत गौतम और राजनाथ सिंह के साथ-साथ मोदी, शाह और कुमार की तस्वीरें या प्रतीक लगाए गए थे।
इस प्रतीकात्मक दहन के जरिए, एनएसयूआई (NSUI) ने उन बुराइयों को उजागर करने की कोशिश की, जिन्हें वे "वोट चोरी", परीक्षा पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी, राष्ट्रीय संसाधनों के दोहन, सांप्रदायिकता और भारत की संप्रभुता के लिए खतरा मानते हैं। संगठन ने सरकार पर यौन हिंसा के आरोपी लोगों को बचाने का भी आरोप लगाया। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब एनएसयूआई पिछले कई हफ्तों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। छात्र संगठन उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है और चुनाव आयोग पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि पांडे ने कहा, "विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आज के रावण दहन के जरिए, एनएसयूआई ने 'वोट चोरी', पेपर लीक, बेरोजगारी, संसाधनों के दोहन, सांप्रदायिकता और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोपियों को बचाने के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। संविधान, लोकतंत्र और भारत के युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा।" NSUI के दिल्ली प्रभारी अखिलेश यादव ने कहा, "विजयादशमी के मौके पर, NSUI कार्यालय में रावण का एक अनोखा पुतला जलाया गया। इसमें नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार, अमित शाह, अडानी, अंबानी, डोनाल्ड ट्रंप, मोहन भागवत, अजीत डोभाल, योगी आदित्यनाथ, दुष्यंत गौतम और राजनाथ सिंह को रावण के 10 चेहरों के रूप में दिखाया गया था, जो उन बुराइयों का प्रतीक हैं जिनके खिलाफ हम आज लड़ रहे हैं।" संगठन ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन चुनावी जवाबदेही, संवैधानिक सुरक्षा और सामाजिक न्याय के लिए चलाए जा रहे उनके अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कथित चुनावी गड़बड़ियों और छात्रों तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेंगे।