नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रसंघ और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच चल रहे विवाद के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष और पीएचडी शोधार्थी अदिति मिश्रा को सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित मारपीट, दुर्व्यवहार और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में नोटिस जारी किया है। उन्हें 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर तीन बजे प्रॉक्टोरियल कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। यह नोटिस ऐसे समय जारी हुआ है, जब छात्रसंघ के पदाधिकारी विभिन्न मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय की ओर से नौ अक्टूबर को जारी नोटिस के अनुसार, आठ सितंबर को इंटर-हॉल प्रशासन (आईएचए) के मुख्य द्वार पर हुई एक घटना को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अदिति मिश्रा ने सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और हाथापाई की। इसके अलावा आईएचए के मुख्य द्वार पर लगे कांच के पैनल और एक खिड़की को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच के अधीन हैं और विश्वविद्यालय ने अभी इस मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है।
22 अक्टूबर को कमेटी के सामने पेश होने का निर्देश
प्रॉक्टर कार्यालय ने अदिति मिश्रा को 22 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में उपस्थित होने के लिए कहा है।नोटिस के अनुसार, दोपहर तीन बजे प्रॉक्टोरियल कमेटी मामले की सुनवाई करेगी। इस दौरान अदिति को अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर स्पष्टीकरण देने का अवसर मिलेगा।विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें अपने बचाव में संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति भी दी है।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि वह निर्धारित समय पर सुनवाई में शामिल नहीं होती हैं, तो समिति उनकी अनुपस्थिति में भी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले पर निर्णय ले सकती है।
आठ सितंबर की घटना को लेकर शिकायत
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पूरा मामला आठ सितंबर को हुई एक कथित घटना से जुड़ा हुआ है।शिकायत में कहा गया है कि उस दिन इंटर-हॉल प्रशासन कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के पास सुरक्षाकर्मियों और छात्रसंघ अध्यक्ष के बीच विवाद हुआ था।
आरोप है कि इस दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और हाथापाई भी हुई।शिकायत में आईएचए के मुख्य द्वार पर लगे शीशे और एक खिड़की को नुकसान पहुंचाए जाने का भी उल्लेख है।हालांकि, घटना किन परिस्थितियों में हुई और नुकसान किस प्रकार पहुंचा, इसका पूरा विवरण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।पहले से परिसर में प्रवेश पर रोकइस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अदिति मिश्रा के खिलाफ पहले से अनुशासनात्मक आदेश प्रभावी है।
नोटिस में दो फरवरी के एक कार्यालय आदेश का उल्लेख किया गया है, जिसके तहत उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित किया गया था और परिसर में प्रवेश पर रोक लगाई गई थी।इसी वजह से 22 अक्टूबर की सुनवाई में शामिल होने के लिए विशेष व्यवस्था निर्धारित की गई है।अदिति को दोपहर ढाई बजे विश्वविद्यालय के उत्तरी द्वार स्थित सुरक्षा कार्यालय में पहुंचने के लिए कहा गया है।वहां से सुरक्षाकर्मी उन्हें मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय तक लेकर जाएंगे, जहां समिति के समक्ष उनकी सुनवाई होगी।
10 से 12 अन्य छात्रों को भी नोटिस मिलने का दावा
जेएनयू के कुछ छात्रों ने दावा किया है कि आठ सितंबर के विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामले में अन्य विद्यार्थियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।छात्रों के अनुसार, करीब 10 से 12 अन्य विद्यार्थियों को इसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन नोटिसों की कुल संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी नोटिस एक ही शिकायत के आधार पर जारी किए गए हैं या अलग-अलग घटनाओं से संबंधित हैं।भूख हड़ताल के बीच बढ़ा विवादअदिति मिश्रा को नोटिस जारी किए जाने का यह घटनाक्रम जेएनयू में जारी छात्रसंघ की भूख हड़ताल के बीच सामने आया है।छात्रसंघ के सदस्य अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
उनकी प्रमुख मांगों में छात्रसंघ पदाधिकारियों के निष्कासन के आदेश वापस लेना, जेएनयू प्रवेश परीक्षा को दोबारा शुरू करना और यौन उत्पीड़न के खिलाफ लैंगिक संवेदनशीलता समिति को बहाल करना शामिल है।छात्रसंघ का कहना है कि इन मुद्दों का सीधा संबंध विद्यार्थियों के अधिकारों और विश्वविद्यालय की व्यवस्था से है।हालांकि, भूख हड़ताल और आठ सितंबर की कथित घटना के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध को लेकर प्रशासन की ओर से कोई अलग निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जेएनयू प्रवेश परीक्षा बहाल करने की मांग
छात्रसंघ की मांगों में जेएनयू प्रवेश परीक्षा यानी जेएनयूईई को फिर से शुरू करना भी शामिल है।इस मांग को लेकर छात्रसंघ पदाधिकारी विश्वविद्यालय की प्रवेश व्यवस्था पर अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं।
इसके अलावा छात्र प्रतिनिधियों के खिलाफ जारी अनुशासनात्मक आदेशों को वापस लेने की मांग भी प्रमुख है।छात्रसंघ के सदस्य इन मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन से समाधान चाहते हैं।भूख हड़ताल के कारण परिसर में छात्र राजनीति और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर चर्चा तेज है।
लैंगिक संवेदनशीलता समिति की बहाली का मुद्दाछात्रसंघ की एक अन्य मांग यौन उत्पीड़न के खिलाफ लैंगिक संवेदनशीलता समिति यानी जीएसकैश की बहाली है।इस समिति से संबंधित मुद्दा जेएनयू के छात्र आंदोलनों में पहले भी प्रमुख रहा है।
छात्रसंघ के पदाधिकारी चाहते हैं कि विश्वविद्यालय परिसर में लैंगिक संवेदनशीलता और यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए उनकी मांग के अनुरूप व्यवस्था की जाए।फिलहाल प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच इन मांगों पर किसी अंतिम सहमति की जानकारी सामने नहीं आई है।
आरोपों पर अदिति को मिलेगा पक्ष रखने का मौका
प्रॉक्टोरियल कमेटी की सुनवाई में अदिति मिश्रा को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।इस दौरान वह आठ सितंबर की घटना से संबंधित आरोपों का जवाब दे सकती हैं।यदि उनके पास अपनी स्थिति स्पष्ट करने वाले दस्तावेज, रिकॉर्डिंग या अन्य साक्ष्य हैं, तो उन्हें भी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।
किसी भी अनुशासनात्मक मामले में संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।विश्वविद्यालय प्रशासन का अंतिम निर्णय शिकायत, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्ष के जवाब पर निर्भर करेगा।विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
अदिति मिश्रा को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन से विस्तृत प्रतिक्रिया की अपेक्षा की जा रही है।हालांकि, मंगलवार तक इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई अतिरिक्त सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया था।
इसी तरह अदिति मिश्रा के विस्तृत जवाब की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।ऐसे में सुरक्षाकर्मियों से मारपीट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को अभी सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
22 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
जेएनयू में जारी भूख हड़ताल और छात्रसंघ अध्यक्ष को मिले नोटिस के बाद अब 22 अक्टूबर की सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है।इस दिन प्रॉक्टोरियल कमेटी के सामने अदिति मिश्रा अपना पक्ष रख सकेंगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित साक्ष्यों का परीक्षण करना होगा।फिलहाल आठ सितंबर की घटना से जुड़े आरोपों की जांच जारी है। समिति की सुनवाई और आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन क्या निर्णय लेता है।