दिल्ली  : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। अब विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी की ओर से अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
जानकारी के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नई गुहार लगाई गई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी के PA से जुड़े मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में कुछ आरोपों का जिक्र करते हुए अदालत से हस्तक्षेप की अपील की गई है। हालांकि, इस मामले में अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे होने के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह पार्टी के संगठन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके करीबी लोगों को लेकर उठने वाले किसी भी विवाद का राजनीतिक असर भी देखने को मिलता है।
विपक्ष लगातार अभिषेक बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मामलों को लेकर सवाल उठाता रहा है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी कई मौकों पर राज्य सरकार और टीएमसी नेतृत्व पर निशाना साधते रहे हैं। अब उनके PA को लेकर उठाया गया मुद्दा इसी राजनीतिक संघर्ष की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
शुभेंदु अधिकारी का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी के करीबी लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि केवल बड़े नेताओं तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके आसपास काम करने वाले लोगों की गतिविधियों की भी जांच जरूरी है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा लगातार टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि चुनावी माहौल को देखते हुए विपक्ष इस तरह के मुद्दे उठा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई पर है। न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल यह मामला बंगाल की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में कई मामलों को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच टकराव देखने को मिला है। भर्ती घोटाला, कथित भ्रष्टाचार और अन्य मामलों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर रहा है।
अभिषेक बनर्जी भी कई बार जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध चुके हैं। उनका कहना रहा है कि राजनीतिक दबाव बनाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं भाजपा का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में अभिषेक बनर्जी का कद लगातार बढ़ा है। ऐसे में उनके करीबी सहयोगियों से जुड़े मामले भी राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
शुभेंदु अधिकारी और भाजपा लंबे समय से टीएमसी नेतृत्व पर हमला करते रहे हैं। आने वाले चुनावों को देखते हुए दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दायर नई याचिका के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है। अदालत के रुख और आगे की कार्रवाई के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में क्या दिशा आगे बनती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी भाजपा के बीच जारी संघर्ष को सामने ला दिया है। अभिषेक बनर्जी के PA को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को और गर्म कर दिया है।
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