New Delhi: लाल किले के सामने ज्ञानपथ पर गूंजा देशभक्ति का संदेश, बनी ‘वंदे मातरम’ आकृति
‘ज्ञानपथ’ पर बच्चों की रचनात्मकता, ‘वंदे मातरम’ की आकृति ने खींचा ध्यान
नई दिल्ली : लाल किले की प्राचीर से देश की आजादी का 80वां जश्न मनाने के लिए हुए भव्य समारोह में सेना, नौसेना और वायु सेना के जवानों तथा ‘मेरा भारत’ के स्वयंसेवकों सहित कुल 2,500 लड़के और लड़कियों ने हिस्सा लिया। ये सभी ज्ञानपथ पर लाल किले की प्राचीर के सामने बैठे और ‘वंदे मातरम’ की आकृति बनाई। समारोह की थीम ‘विकसित भारत @2047’ को प्रदर्शित करने के लिए ज्ञानपथ पर विशेष दृश्य अवरोधक भी लगाए गए।
इस वर्ष लाल किले पर हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया था। इनमें समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग शामिल हुए। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में आयोजित विभिन्न प्रश्नोत्तरी और प्रतियोगिताओं के विद्यार्थी भी इस भव्य समारोह को देखने के लिए पहुंचे। विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से पारंपरिक वेशभूषा पहने 1,500 से अधिक लोगों को भी आमंत्रित किया गया। कुल 200 स्वयंसेवकों ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर आगंतुकों को उनके निर्धारित घेरे तक पहुंचने में सहायता की। इनमें एनसीसी और ‘मेरा भारत’ के 100-100 स्वयंसेवक थे। लाल किले की ओर जाने वाले मार्ग पर इन स्वयंसेवकों की तैनाती रही।
इस वर्ष के निमंत्रण पत्र पर ‘सेवा तीर्थ’ और ‘धर्म चक्र’ की झलक प्रस्तुत की गई थी। वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने और जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की जगहों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए। इनमें बड़खल, भीमताल, चंद्रताल, चिल्का, दलपत सागर, डिमना, दूधसागर, हाफलोंग, हरिके, हुसैन सागर, कंवर, कांकरिया, कोलेरू, लोकतक, लोनार, पैंगोंग त्सो, पुलिकट, पुष्कर, रवींद्र सरोवर, रामगढ़ ताल, रुद्रसागर, साख्य सागर, शांति सागर, वेम्बनाड और वुलर झील शामिल हैं।
लाल किले पर राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट्स और ‘मेरा भारत’ के स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम के बाद विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। इसका उद्देश्य समारोह समाप्त होने और दर्शकों के लौटने के बाद लाल किले परिसर में व्यवस्थित तरीके से कचरे को तुरंत हटाना था। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संभावित बारिश को ध्यान में रखते हुए जलभराव और पानी के अतिप्रवाह को रोकने के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। लाल किले और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी तथा सीवेज व्यवस्था की पूरी तरह सफाई और आवश्यक रखरखाव किया गया।