दिल्ली हाई कोर्ट के बाद SEM कोर्ट पहुंचीं नेहा बोरा पुलिस से मांगे गए दस्तावेज
नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा शनिवार को दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश हुईं। यह पेशी दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद हुई। नेहा बोरा ने हाई कोर्ट में उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। शनिवार की सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट ने पुलिस को नेहा बोरा के वकील को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी।
पुलिस को सभी दस्तावेज सौंपने का निर्देश
शनिवार को SEM अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान नेहा बोरा की ओर से पेश वकील अभिक चिमनी ने मामले से संबंधित दस्तावेजों की मांग की। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने पुलिस को निर्देश दिया कि नोटिस जारी करने के आधार और जांच से संबंधित सभी दस्तावेज बचाव पक्ष को उपलब्ध कराए जाएं।अदालत ने नेहा बोरा के वकील को दस्तावेजों का अध्ययन करने और अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अब बचाव पक्ष इन दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद अपना पक्ष रखेगा।वकील अभिक चिमनी ने कहा कि उनकी कानूनी टीम को शनिवार को जो दस्तावेज मिले हैं, उनका विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज की थी याचिका
इससे पहले शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार के माध्यम से जांच के दौरान शांति बनाए रखने का आश्वासन देने के लिए कहा गया था।न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने याचिका खारिज करते हुए निर्देश दिया था कि नेहा बोरा को उन सभी सामग्रियों की जानकारी दी जाए, जिनके आधार पर नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट आगे की कार्रवाई करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करें।हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि मामले में केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर नोटिस जारी नहीं किया गया था, बल्कि पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज विभिन्न घटनाओं से संबंधित जानकारियां भी थीं।
16 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला 16 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, नेहा बोरा को इस मार्च में शामिल होने जाते समय हिरासत में लिया गया था। अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया था।पुलिस की ओर से जारी नोटिस में आरोप लगाया गया था कि 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में नारेबाजी की गई, जंतर-मंतर के आसपास निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन किएगए और कनॉट प्लेस में लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कथित तौर पर उकसाया गया।इन्हीं घटनाओं के आधार पर स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया था। हालांकि, ये आरोप हैं और इन पर नेहा बोरा को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना है।
वकील बोले- आरोप जानना और जवाब देना हर व्यक्ति का अधिकार
नेहा बोरा के वकील अभिक चिमनी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करते समय उसे यह जानने का अधिकार है कि उसके विरुद्ध क्या आरोप लगाए गए हैं और उन आरोपों का आधार क्या है।उन्होंने जोर देकर कहा कि संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी मिलना चाहिए। बचाव पक्ष का कहना है कि हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में जांच से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने पर जोर दिया है।नेहा बोरा ने भी शांति बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को लेकर आपत्ति जताई है। उनके पक्ष का तर्क है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में आता है और इस मामले में जारी नोटिस को कानूनी रूप से चुनौती दी जानी चाहिए।
29 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
अब इस मामले में अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। नेहा बोरा की कानूनी टीम पुलिस से मिले दस्तावेजों का अध्ययन करके अपना जवाब दाखिल करेगी। इसके बाद मजिस्ट्रेट उपलब्ध तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेंगे।फिलहाल, हाई कोर्ट ने नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है, लेकिन साथ ही जांच से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाने के निर्देश भी दिए हैं। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि शांति बॉन्ड से संबंधित कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।