नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद सुनील तटकरे ने चुनाव आयोग का बचाव किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और किसी मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक राय होने का मतलब यह नहीं है कि उस संस्था पर अविश्वास किया जाए। तटकरे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों का उल्लेख करते हुए विपक्ष की आलोचना पर सवाल उठाए।
एनसीपी सांसद सुनील तटकरे का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के कई दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे पर दिल्ली में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।मंगलवार को विरोध प्रदर्शनों के बीच सुनील तटकरे ने चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन केवल मतभेद के आधार पर किसी स्वतंत्र संस्था के प्रति अविश्वास व्यक्त करना उचित नहीं है।तटकरे ने कहा कि चुनाव आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चुनावों से जुड़े मामलों में विभिन्न दलों की अलग-अलग धारणाएं हो सकती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक असहमति और किसी संवैधानिक संस्था पर अविश्वास जताने के बीच अंतर होना चाहिए।
एनसीपी सांसद ने अपने बयान में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की जीत के बाद चुनावी प्रक्रिया की आलोचना बढ़ गई। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल और पिछले चुनावों के परिणामों का संदर्भ देते हुए विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए।तटकरे के बयान का प्रमुख मुद्दा चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और राजनीतिक दलों का उसके प्रति दृष्टिकोण रहा। उन्होंने यह संदेश दिया कि चुनाव परिणामों और चुनावी व्यवस्थाओं को लेकर असहमति के बावजूद आयोग की स्वतंत्र संवैधानिक स्थिति का सम्मान किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। विपक्षी दल इसे मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।इसी मामले को लेकर राहुल गांधी सहित INDIA गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। गठबंधन की याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की स्वतंत्र जांच, पुनरीक्षण प्रक्रिया की समीक्षा और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने जैसी मांगें शामिल हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार चलाई जा रही है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए आवेदन और सुधार के अवसर उपलब्ध हैं।वहीं, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। कुछ विपक्षी दल मतदान प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और सत्यापन की मांग करते रहे हैं। ऐसे में सुनील तटकरे की टिप्पणी चुनावी व्यवस्था पर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस से जुड़ी हुई है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर तटकरे की टिप्पणी भी इसी बहस का हिस्सा है। उन्होंने महायुति की जीत के बाद चुनाव प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों का उल्लेख किया। हालांकि, चुनाव परिणामों की राजनीतिक आलोचना और वास्तविक चुनावी अनियमितताओं के आरोप अलग-अलग विषय हैं, जिनकी जांच उपलब्ध साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जाती है।फिलहाल दिल्ली में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मुद्दे पर विपक्षी दलों का विरोध जारी है। इसी बीच एनसीपी सांसद सुनील तटकरे ने आयोग की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए राजनीतिक मतभेदों को संस्थागत अविश्वास का आधार नहीं बनाने की बात कही है।
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