नई दिल्ली। सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने केंद्र सरकार को जानकारी दी है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख हस्तियों के अकाउंट्स से पोस्ट होने वाले कंटेंट की निगरानी के लिए अधिक सख्त व्यवस्था लागू करेगी। Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म की मालिक कंपनी ने यह कदम प्रधानमंत्री के Facebook पोस्ट पर हाल ही में हुई अस्थायी रोक से जुड़े विवाद के बाद उठाया है।
सूत्रों के अनुसार, मेटा ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भेजे गए एक पत्र में बताया है कि प्रधानमंत्री और अन्य हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स से जुड़े पोस्ट की अब अतिरिक्त स्तरों पर समीक्षा की जाएगी। कंपनी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, जिसमें किसी बड़े सार्वजनिक व्यक्ति की पोस्ट पर विवाद या अस्थायी कार्रवाई की नौबत आए।
मेटा की ओर से सरकार को दिए गए जवाब में बताया गया है कि हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स के कंटेंट की समीक्षा के लिए कंपनी के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच और मूल्यांकन शामिल होगा, ताकि किसी भी कार्रवाई से पहले सभी जरूरी पहलुओं पर विचार किया जा सके।
यह घटनाक्रम उस विवाद के बाद सामने आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook पोस्ट को लेकर अस्थायी रोक की स्थिति बनी थी। इस मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉडरेशन, नियमों के पालन और बड़े सार्वजनिक व्यक्तियों के अकाउंट्स के प्रबंधन को लेकर चर्चा तेज कर दी थी।
मेटा दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में से एक है और उसके प्लेटफॉर्म पर करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ता मौजूद हैं। ऐसे में सरकार और कंपनी के बीच कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दे काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। खासकर राजनीतिक नेताओं, सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक महत्व रखने वाले व्यक्तियों के अकाउंट्स से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता अधिक रहती है।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले को लेकर मेटा अधिकारियों और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच बैठक भी प्रस्तावित है। यह बैठक इस सप्ताह के अंत या अगले सप्ताह की शुरुआत में हो सकती है। इसमें कंपनी की ओर से उठाए गए कदमों और भविष्य की निगरानी व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
बैठक में यह भी चर्चा हो सकती है कि बड़े सार्वजनिक खातों के कंटेंट की समीक्षा प्रक्रिया को किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जाए। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नियमों का पालन पारदर्शी तरीके से हो और महत्वपूर्ण व्यक्तियों से जुड़े मामलों में अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉडरेशन एक जटिल प्रक्रिया है। कंपनियों को एक ओर अपने सामुदायिक नियमों और नीतियों का पालन करना होता है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक हित, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्थानीय कानूनों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। बड़े नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों के अकाउंट्स के मामले में यह संतुलन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
मेटा पहले भी अपने प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट समीक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम और मानव समीक्षा टीमों का इस्तेमाल करती रही है। हालांकि, हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स के लिए अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था लागू करने का कदम कंपनी की ओर से एक विशेष सावधानी के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच डिजिटल नियमों को लेकर लगातार संवाद होता रहा है। भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आईटी नियमों के तहत शिकायत निवारण, कंटेंट हटाने और पारदर्शिता से जुड़े प्रावधान लागू हैं। ऐसे में बड़ी टेक कंपनियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रहती है।
मेटा के इस कदम के बाद अब निगाहें आगामी बैठक पर हैं, जिसमें सरकार और कंपनी के प्रतिनिधि इस नई व्यवस्था को लेकर आगे की रणनीति पर बातचीत कर सकते हैं। अगर यह प्रणाली लागू होती है, तो प्रधानमंत्री समेत अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक खातों के कंटेंट की समीक्षा प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक विस्तृत और नियंत्रित हो सकती है।
फिलहाल, मेटा की ओर से सरकार को दी गई जानकारी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बेहतर निगरानी और समन्वय की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में होने वाली बैठक के बाद इस व्यवस्था को लेकर और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।