Jane ji's के भविष्य को लेकर महबूबा चिंतित, जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिया बयान

Update: 2026-07-17 15:39 GMT

New Delhi नई दिल्ली :  पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत करने से इनकार करना औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।

महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक युवाओं के भविष्य और उनकी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का आंदोलन देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों को सामने ला रहा है और इस दौरान वह अपनी जान जोखिम में डालकर आवाज उठा रहे हैं।

पीडीपी प्रमुख ने अपने पोस्ट में लिखा कि जंतर-मंतर के दृश्य उन्हें भारत की आजादी के आंदोलन की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए लंबा संघर्ष किया और बड़ी कुर्बानियां दीं। महबूबा ने आरोप लगाया कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी प्रशासनिक सोच में औपनिवेशिक रवैया पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता और युवाओं की आवाज सुनना जरूरी है। सरकार को विरोध करने वालों के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए, क्योंकि बातचीत के जरिए ही किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

महबूबा मुफ्ती का यह बयान ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर पर कुछ युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज है। विपक्षी दल लगातार सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करने की मांग कर रहे हैं।

महबूबा ने अपने बयान में सोनम वांगचुक का जिक्र करते हुए कहा कि वह युवाओं के अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह प्रदर्शनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुने और संवाद का रास्ता अपनाए।

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सरकार पहले भी कई मौकों पर कहती रही है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है और संबंधित मुद्दों पर नियमों के अनुसार विचार किया जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंतर-मंतर जैसे स्थानों पर होने वाले आंदोलनों को लेकर अक्सर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद देखने को मिलते हैं। विपक्ष जहां इसे जनता की आवाज बताता है, वहीं सरकार कानून व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कदम उठाने की बात करती है।

महबूबा मुफ्ती के इस बयान के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उन्होंने अपने वक्तव्य के जरिए सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर सवाल उठाए हैं और प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की मांग दोहराई है।

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