नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक विरोध-प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने बुधवार, 14 अक्टूबर को इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार को अपने इस कदम के परिणामों का एहसास होगा। मनोज झा ने दावा किया कि जनता आज नहीं तो कल जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में वापस हासिल कर लेगी।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में मनोज झा ने कहा कि जंतर-मंतर केवल एक स्थान नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व वाला विरोध-प्रदर्शन स्थल है। उन्होंने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह कदम जनता के विरोध और असहमति के प्रति सरकार के डर को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी आवाज उठाने का अवसर मिलना चाहिए।
'आज नहीं तो कल, जंतर-मंतर वापस लेंगे'
मनोज झा ने सरकार के फैसले को लेकर कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार को इसका एहसास होगा। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किस डर की वजह से जंतर-मंतर जैसी ऐतिहासिक जगह को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाया गया हैआरजेडी सांसद ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि लोग जंतर-मंतर को वापस हासिल करेंगे। उन्होंने सरकार के रवैये को दमनकारी बताते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के कदम सरकार की कमजोरी को उजागर करते हैं।झा ने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों की आवाज का प्रतीक रहा है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों ने कभी विरोध-प्रदर्शन नहीं किया, उनसे जनता के विरोध के अधिकार को समझने की कितनी उम्मीद की जा सकती है।
दिल्ली पुलिस ने बदली प्रदर्शन स्थलों की व्यवस्था
दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की घोषणा की थी। इसके स्थान पर दिल्ली में तीन अन्य स्थानों को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है।इनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। अब इन स्थानों पर निर्धारित नियमों के अनुसार विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जा सकेंगे।दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के बाद वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों को चिह्नित करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान निर्धारित करने की आवश्यकता दर्ज की थी।
जंतर-मंतर का ऐतिहासिक महत्व
दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संघों और जन आंदोलनों के लिए महत्वपूर्ण विरोध-प्रदर्शन स्थल रहा है। यहां अलग-अलग मांगों को लेकर अनेक आंदोलन और धरने आयोजित किए जाते रहे हैं।राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्रों के नजदीक होने के कारण जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों को विशेष महत्व मिलता रहा है। यही वजह है कि इसे प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं।मनोज झा ने इसी ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि विरोध-प्रदर्शन के लिए पहचानी जाने वाली इस जगह को समाप्त करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जनता इस फैसले को स्वीकार नहीं करेगी।
विपक्ष ने भी जताई फैसले पर नाराजगी
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने के फैसले पर अन्य विपक्षी नेताओं ने भी विरोध दर्ज कराया है। विपक्षी दलों ने इस कदम को लोकतांत्रिक असहमति व्यक्त करने के अवसरों को सीमित करने वाला बताया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।मनोज झा के बयान के बाद जंतर-मंतर को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस विवाद के केंद्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण का मुद्दा है।फिलहाल जंतर-मंतर निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर है। वहीं, आरजेडी सांसद मनोज झा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस फैसले का विरोध करते हैं और इसे वापस लिए जाने की मांग के पक्ष में हैं।
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