नई दिल्ली। रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े कथित बैंक लोन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अमित बापना को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता और कथित वित्तीय अनियमितताओं में बापना की भूमिका का हवाला दिया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने अमित बापना की भूमिका पर की टिप्पणी
अमित बापना रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) रह चुके हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, बापना ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के कामकाज से जुड़े निर्णयों में कथित तौर पर बिना उचित अधिकार के हस्तक्षेप किया।अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के निदेशक मंडल की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए कॉर्पोरेट ऋण जारी किए गए थे। मामले में इन लेनदेन और संबंधित अधिकारियों की भूमिकाओं की जांच की जा रही है।
ED ने जमानत याचिका का किया विरोध
प्रवर्तन निदेशालय ने सुनवाई के दौरान अमित बापना की जमानत याचिका का विरोध किया। जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला बड़ी रकम के कथित वित्तीय घोटाले से जुड़ा हुआ है।ईडी के अनुसार, रिलायंस समूह से जुड़ी वित्तीय कंपनियों के माध्यम से जारी किए गए ऋणों की राशि कथित तौर पर दूसरी कंपनियों तक पहुंचाई गई। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन लेनदेन के जरिए धन के वास्तविक स्रोत और उसके उपयोग को छिपाने का प्रयास किया गया।ईडी ने दावा किया है कि कुछ शेल कंपनियों के माध्यम से धन का हस्तांतरण किया गया था। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद ही होगा।
अप्रैल में हुई थी दो पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय ने अमित बापना और रिलायंस समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ झुनझुनवाला को 15 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया था।गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था। अदालत ने शुरुआती जांच के दौरान उन्हें पांच दिन की ईडी हिरासत में भेजा था।इसके बाद 20 अप्रैल को जांच एजेंसी ने दोनों को फिर अदालत में पेश किया। विशेष न्यायाधीश हसन अंजर ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।
55 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने जून 2026 में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें अमित बापना, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य व्यक्तियों तथा कंपनियों सहित कुल 55 आरोपियों को शामिल किया गया है।ईडी ने अपनी जांच में कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई वित्तीय लेनदेन का उल्लेख किया है।जांच एजेंसी का आरोप है कि विभिन्न कंपनियों के बीच ऋण और रकम के हस्तांतरण के माध्यम से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया।
करीब 11,500 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल की जांच
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान अदालत ने लगभग 11,500 करोड़ रुपये से संबंधित धन के लेनदेन का पता लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।ईडी का दावा है कि कथित योजना के तहत ऋण की रकम को समूह से जुड़ी विभिन्न कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया। जांच में ईमेल, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई है।अदालत ने प्रारंभिक चरण में कहा था कि मामले की जटिलता को देखते हुए आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला का पता लगाना जरूरी है।
अमिताभ झुनझुनवाला को मिली मेडिकल आधार पर राहत
इसी मामले में सह-आरोपी अमिताभ झुनझुनवाला को दिल्ली हाई कोर्ट से चिकित्सकीय आधार पर जमानत मिल चुकी है। हालांकि अमित बापना को राउज एवेन्यू कोर्ट से ऐसी राहत नहीं मिल सकी।दोनों आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया है।अमित बापना की जमानत याचिका खारिज होने के बाद मामले की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी। अब आगामी सुनवाई और जांच एजेंसी की ओर से पेश साक्ष्यों पर निगाहें रहेंगी। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और दोष सिद्ध होने तक उन्हें निर्दोष माना जाएगा।