नई दिल्ली। दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को बड़ी राहत देते हुए न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया। मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित अदालत में दोनों नेताओं को पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने उनकी ओर से प्रस्तुत जमानती बॉन्ड स्वीकार कर लिए। अदालत ने आदेश दिया कि यदि दोनों किसी अन्य मामले में हिरासत में नहीं हैं, तो उन्हें जेल से रिहा किया जा सकता है। इस फैसले के साथ करीब सात दिनों से न्यायिक हिरासत में बंद दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
SEM कोर्ट ने स्वीकार किए जमानती बॉन्ड
बुधवार को सौरव दास और आशुतोष रांका को दो दिन की बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।सुनवाई के दौरान दोनों कार्यकर्ताओं की ओर से नए जमानती दस्तावेज और जमानतदार प्रस्तुत किए गए। अदालत ने इन दस्तावेजों पर विचार करने के बाद उन्हें स्वीकार कर लिया।स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने दोनों नेताओं की आगे की न्यायिक हिरासत आवश्यक नहीं मानते हुए उनकी रिहाई का आदेश जारी किया।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिहाई तभी प्रभावी होगी, जब दोनों किसी अन्य मामले में हिरासत में नहीं होंगे।
दिल्ली पुलिस ने मांगी थी तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था और पूर्व में दिए गए शांति बनाए रखने के आश्वासन के कथित उल्लंघन से जुड़े मुद्दे उठाए गए।हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत जमानती दस्तावेजों पर विचार किया।करीब डेढ़ घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। इसके बाद जमानती बॉन्ड स्वीकार करते हुए दोनों नेताओं की रिहाई का आदेश जारी किया गया।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई थी गिरफ्तारी
दरअसल, सीजेपी के दोनों कार्यकर्ताओं को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास किया और बैरिकेड लगाए गए प्रवेश द्वार पर चढ़ गए थे।इसके बाद पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। 14 अक्टूबर को दोनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।19 अक्टूबर को हिरासत की अवधि समाप्त होने पर अदालत ने इसे दो दिन और बढ़ा दिया था। इस फैसले के बाद दोनों नेताओं के वकीलों ने कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।
सोमवार को खारिज कर दिए गए थे जमानतदार
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों कार्यकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत जमानतदारों को स्वीकार नहीं किया था।अदालत ने जमानती दस्तावेजों में कमियों और शांति व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख करते हुए नए जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा था।इसके चलते सौरव दास और आशुतोष रांका को दो दिन और न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा।बुधवार को नए जमानती दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद अदालत ने उन्हें स्वीकार कर लिया और रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंचे थे दोनों कार्यकर्ता
इससे पहले सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।बुधवार को न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब संबंधित आदेश के खिलाफ अन्य कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं, तो याचिकाकर्ताओं ने सीधे उच्च न्यायालय का रुख क्यों किया।अदालत ने उन्हें पहले एसईएम कोर्ट की कार्यवाही के परिणाम की प्रतीक्षा करने की सलाह दी।इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली गई।
सात दिनों की हिरासत के बाद मिली राहत
करीब एक सप्ताह तक तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में रहने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत से राहत मिली है।हालांकि, उनकी रिहाई का आदेश प्रदर्शन से जुड़े सभी आरोपों के समाप्त होने का संकेत नहीं है। संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं और शांति व्यवस्था से जुड़ी शर्तें लागू रह सकती हैं।फिलहाल एसईएम कोर्ट के आदेश से दोनों सीजेपी कार्यकर्ताओं की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामले में यह महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।