नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अंकिता के माता-पिता ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपनी बेटी की हत्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी अधिकारियों को दी और मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीआई अधिकारियों ने परिवार को भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से की जाएगी तथा सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल होगी।यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब उत्तराखंड भाजपा के पूर्व प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। पीड़ित परिवार ने इस नियुक्तिका विरोध करते हुए मामले में कथित प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की है।
CBI अधिकारियों के सामने रखे मामले से जुड़े सवाल
अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली में सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर हत्याकांड से जुड़े उन सवालों को उठाया, जिनका जवाब परिवार लंबे समय से मांग रहा है।परिवार का कहना है कि हत्या के मामले में तीन लोगों को सजा मिल चुकी है, लेकिन कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवाल अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुए हैं।अधिकारियों ने सभी पहलुओं की जांच करने का भरोसा दिया है। हालांकि, शुक्रवार की इस मुलाकात और अधिकारियों के आश्वासन की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है।
2022 में हुई थी अंकिता भंडारी की हत्या
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं।सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था।इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था। मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था।मई 2025 में अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
कथित VIP की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड में शुरुआत से ही एक कथित वीआईपी की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।आरोप लगाया गया था कि अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले किसी प्रभावशाली अतिथि को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था।पीड़ित परिवार का कहना है कि इस पहलू की विस्तृत जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हत्या से पहले किन परिस्थितियों में अंकिता पर दबाव डाला गया था।हालांकि, कथित वीआईपी की भूमिका और पहचान से जुड़े आरोप अभी न्यायिक रूप से प्रमाणित नहीं हुए हैं।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के बाद बढ़ा विवाद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया था।इस नियुक्ति के बाद अंकिता के माता-पिता ने विरोध दर्ज कराया। परिवार ने गौतम पर मामले से जुड़े कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर आरोप लगाए हैं।दुष्यंत गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनके खिलाफ अंकिता हत्याकांड में आपराधिक संलिप्तता का कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।परिवार ने मांग की है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक उनकी राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
दिल्ली में धरने पर बैठे थे अंकिता के माता-पिता
इससे पहले बुधवार, 14 अक्टूबर को अंकिता के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे थे।उन्होंने बेटी के लिए न्याय और मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग उठाई।धरनास्थल पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी पहुंचे थे। दोनों नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया।गुरुवार तड़के दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिया था। हालांकि, कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
निष्पक्ष जांच की मांग पर परिवार अडिग
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि परिवार अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई जारी रखेगा।उन्होंने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।परिवार ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वे आंदोलन को और व्यापक कर सकते हैं।
अब CBI जांच के निष्कर्षों पर नजर
अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है, लेकिन कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों को लेकर विवाद जारी है।पीड़ित परिवार की मांग है कि जांच एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित व्यक्तियों और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल करे।फिलहाल इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। ऐसे में सीबीआई जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। जांच के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या आगे किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आधार बनता है।