दिल्ली यूनिवर्सिटी में बड़ा विवाद: छात्रा की कथित तस्वीरें लेने के आरोप में प्रोफेसर निलंबित
DU में छात्रा की निजता से खिलवाड़ का आरोप, प्रोफेसर सस्पेंड; मोबाइल की होगी फोरेंसिक जांच
DELHI-NCR: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में एक छात्रा की कथित तौर पर बिना अनुमति गुपचुप तस्वीरें लेने का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है, जबकि उनका मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रारंभिक जांच शुरू की। छात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर संबंधित प्रोफेसर को प्रशासनिक कार्यों से अलग कर दिया गया है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। विश्वविद्यालय का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा और गरिमा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जांच के तहत अधिकारियों ने प्रोफेसर का मोबाइल फोन अपने कब्जे में लेकर फोरेंसिक लैब भेज दिया है। विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि मोबाइल में कथित तस्वीरें मौजूद हैं या नहीं, उन्हें कब और कैसे लिया गया तथा क्या उनसे किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई है। फोरेंसिक रिपोर्ट जांच का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए संबंधित नियमों के तहत प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रोफेसर के खिलाफ विश्वविद्यालय के अनुशासनात्मक नियमों के अलावा कानून के अनुसार भी कार्रवाई की जा सकती है।
घटना के सामने आने के बाद परिसर में छात्रों के बीच नाराजगी देखी गई। कई छात्र संगठनों ने मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों, विशेषकर छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की बिना अनुमति तस्वीर लेना और उसका अनुचित उपयोग करना निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाती है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।