Delhi में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, फीस पर लगेगी लगाम

Update: 2026-07-03 11:03 GMT

New Delhi नई दिल्ली :  दिल्ली सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को 15 जुलाई 2026 तक स्कूल स्तरीय शुल्क विनियमन समिति (SLFRC) का गठन अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद उठाया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य स्कूल फीस निर्धारण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायसंगत बनाना है।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को किफायती और सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा समाज सेवा का माध्यम है, व्यापार का नहीं। किसी भी स्कूल को मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने या छिपे हुए शुल्क के जरिए अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी।सरकारी निर्देशों के अनुसार समिति में पांच अभिभावक प्रतिनिधि और तीन शिक्षक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनका चयन सार्वजनिक रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। स्कूलों को लॉटरी प्रक्रिया से कम से कम सात दिन पहले सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी, और पूरी प्रक्रिया की निगरानी सरकार द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक करेंगे।

सरकार ने साफ किया है कि यदि कोई स्कूल प्रबंधन चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें आर्थिक दंड, मान्यता का निलंबन या रद्द करना और जरूरत पड़ने पर स्कूल प्रबंधन का सरकारी अधिग्रहण भी शामिल हो सकता है।इसके अलावा, सभी निजी स्कूलों को 31 जुलाई 2026 तक आगामी तीन वर्षों के लिए फीस प्रस्ताव समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ पिछले तीन वर्षों के चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित ऑडिटेड वित्तीय विवरण देना अनिवार्य किया गया है। बिना ऑडिटेड दस्तावेजों या स्वयं प्रमाणित रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दिल्ली सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के अनुसार नए फीस ढांचे को मंजूरी मिलने तक सभी स्कूल केवल शैक्षणिक सत्र 2025-26 की फीस ही वसूल सकेंगे। यदि किसी स्कूल ने इस अवधि में अतिरिक्त फीस वसूली है तो वह न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन होगी और जरूरत पड़ने पर अभिभावकों को लौटाई या समायोजित की जाएगी।शिक्षा निदेशालय ने सभी क्षेत्रीय निदेशकों और जिला अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि विद्यार्थियों के हित, समान अवसर और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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