लखनऊ: महबूबा मुफ़्ती के बयान पर बीजेपी नेता अपर्णा बिष्ट यादव का पलटवार
Delhi दिल्ली: हाल ही में हुए आतंकी धमाकों को लेकर जहां राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियां तेजी से कार्रवाई कर रही हैं, वहीं इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार तेज हो रही है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ़्ती के बयान ने एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है। महबूबा मुफ़्ती ने धमाकों के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ऐसे कदमों को घाटी में तनाव बढ़ाने वाला बताया था। उनके इसी बयान पर भारतीय जनता पार्टी की नेता अपर्णा बिष्ट यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अपर्णा बिष्ट यादव ने कहा कि महबूबा मुफ़्ती ऐसे समय में "अराजकता फैलाने वाले बयान" दे रही हैं, जब पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा है। उन्होंने बयान को “बहुत जहरीला” बताते हुए कहा कि यह कश्मीर के युवाओं को भड़काने वाला है और ऐसे वक्त में इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
बीजेपी नेता ने कहा, "महबूबा मुफ़्ती को ऐसे अराजक बयान नहीं देने चाहिए। यह बहुत ही जहरीला बयान है। यह कश्मीर के युवाओं को भड़काने वाला बयान है। जिस भी घर से दूसरा अफ़ज़ल गुरु पैदा होगा, वहां हम घुसकर उसे मार गिराएंगे।" उनके इस बयान ने भी राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। कश्मीर में हमेशा की तरह बयान राजनीति और सुरक्षा की जमीनी हकीकत के बीच टकराव का मुद्दा बन जाता है। महबूबा मुफ़्ती पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई और केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करती रही हैं, खासकर घाटी में चल रहे आतंकवाद-रोधी अभियानों पर। लेकिन इस बार मामला दिल्ली धमाके जैसे बड़े आतंकी हमले से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना है।
बीजेपी का कहना है कि आतंकी घटनाओं के समय विपक्ष को देशहित में बोलना चाहिए, जबकि विपक्ष लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि केंद्र आतंकवाद के खतरे को रोकने में कितना सफल है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े आतंकी हमले के बाद राजनीतिक बयानबाजी अक्सर स्थानीय स्तर पर सुरक्षा माहौल को प्रभावित करती है। आतंकी धमाके की जांच एनआईए के हाथों में है और एजेंसी लगातार गिरफ्तारियां कर रही है। ऐसे में राजनीतिक बयान न केवल संवेदनशील माहौल को प्रभावित करते हैं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के अभियानों पर भी अप्रत्यक्ष असर डाल सकते हैं। फिलहाल, महबूबा मुफ़्ती के बयान और अपर्णा यादव की प्रतिक्रिया ने सियासत में नई तकरार पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है, क्योंकि मुद्दा कश्मीर, आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है—जो हमेशा ही देश की राजनीतिक बहस के केंद्र में रहता है।