21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण, 6 मिनट 23 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा
भारत में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं, बल्कि आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा
नई दिल्ली : 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान के इतिहास में एक यादगार घटना बनने जा रहा है। इस दुर्लभ खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच इस प्रकार आ जाएगा कि सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा और दिन के समय कई क्षेत्रों में कुछ मिनटों के लिए अंधेरा छा जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस ग्रहण की पूर्णता (टोटैलिटी) अधिकतम 6 मिनट 23 सेकंड तक रहेगी, जो इस शताब्दी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहणों में शामिल है।
यह सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान के शोधकर्ताओं, फोटोग्राफरों और आम लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। दुनिया के कई देशों में लोग इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए पहले से तैयारियां शुरू कर चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण बेहद दुर्लभ होता है और इसके लिए पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की स्थिति का बिल्कुल सटीक संरेखण (Alignment) आवश्यक होता है।
क्या होता है पूर्ण सूर्य ग्रहण?
पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है तथा उसका आकार पृथ्वी से देखने पर सूर्य को पूरी तरह ढक देता है। इस दौरान कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता और दिन में भी रात जैसा अंधेरा महसूस होता है। ग्रहण के दौरान केवल सूर्य का बाहरी वातावरण, जिसे कोरोना (Corona) कहा जाता है, दिखाई देता है। सामान्य दिनों में सूर्य की तेज रोशनी के कारण कोरोना दिखाई नहीं देता।
6 मिनट 23 सेकंड तक रहेगा अंधेरा
खगोलविदों के अनुसार इस ग्रहण के दौरान अधिकतम अवधि 6 मिनट 23 सेकंड होगी। यह समय पृथ्वी पर मौजूद हर स्थान पर समान नहीं रहेगा। जिस क्षेत्र से ग्रहण का केंद्रीय मार्ग (Path of Totality) गुजरेगा, वहां लोग सबसे अधिक समय तक पूर्ण सूर्य ग्रहण देख पाएंगे। अन्य क्षेत्रों में ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा या बिल्कुल नहीं दिखाई देगा।
किन देशों में दिखाई देगा ग्रहण?
पूर्ण सूर्य ग्रहण का मार्ग मुख्य रूप से अटलांटिक महासागर, उत्तरी अफ्रीका, यूरोप और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगा। स्पेन, मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र, सऊदी अरब, यमन और सोमालिया सहित कई देशों में लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना का साक्षी बन सकेंगे। कुछ क्षेत्रों में ग्रहण पूर्ण रूप से दिखाई देगा, जबकि आसपास के देशों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आएगा।
भारत में क्या दिखाई देगा?
भारत में यह ग्रहण पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देगा। देश के अधिकांश हिस्सों में यह दिखाई नहीं देगा या फिर केवल सीमित रूप में आंशिक ग्रहण देखने की संभावना रहेगी। अंतिम दृश्यता स्थान और समय पर निर्भर करेगी, जिसके बारे में खगोलीय संस्थान समय के करीब विस्तृत जानकारी जारी करेंगे।
ग्रहण के दौरान क्या-क्या होगा?
पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय तापमान में कुछ डिग्री तक गिरावट महसूस की जा सकती है। पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं और कई जानवर रात जैसा व्यवहार करने लगते हैं। कुछ मिनटों के लिए वातावरण में असामान्य शांति और अंधेरा छा जाता है। इसी दौरान सूर्य का कोरोना, प्रॉमिनेन्स और कभी-कभी "डायमंड रिंग" प्रभाव भी देखा जा सकता है, जो ग्रहण के सबसे आकर्षक दृश्यों में से एक माना जाता है।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
ऐसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों को सूर्य के कोरोना, सौर हवाओं (Solar Winds), चुंबकीय क्षेत्र और अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) का अध्ययन करने का दुर्लभ अवसर प्रदान करते हैं। सामान्य परिस्थितियों में सूर्य की तेज चमक के कारण इन पर विस्तृत अध्ययन करना कठिन होता है। ग्रहण के दौरान वैज्ञानिक आधुनिक दूरबीनों और विशेष उपकरणों की मदद से महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र करते हैं।
सुरक्षित तरीके से ही देखें ग्रहण
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने से आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। ग्रहण देखने के लिए केवल प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास (ISO 12312-2 मानक), विशेष सोलर फिल्टर या सुरक्षित प्रोजेक्शन तकनीक का उपयोग करना चाहिए। सामान्य धूप का चश्मा, एक्स-रे फिल्म, रंगीन शीशा या कैमरे का साधारण फिल्टर आंखों की सुरक्षा नहीं करते।
खगोल प्रेमियों में उत्साह
दुनिया भर के खगोल प्रेमी इस ऐतिहासिक ग्रहण को देखने के लिए उन देशों की यात्रा की योजना बना रहे हैं जहां पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा। कई वैज्ञानिक संस्थान और वेधशालाएं भी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करेंगी। सोशल मीडिया पर भी इस ग्रहण को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है और इसे 21वीं सदी की सबसे यादगार खगोलीय घटनाओं में से एक माना जा रहा है।