दिल्ली में फिर से शराब बिक्री की पुरानी व्यवस्था को अपनाएगी केजरीवाल सरकार, निजी दुकानों से एक अगस्त से नहीं होगी बिक्री

उपराज्यपाल द्वारा नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन की सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद दिल्ली सरकार ने शहर में खुदरा शराब बिक्री की पुरानी व्यवस्था को फिर से अपनाने का फैसला किया है।

Update: 2022-07-30 01:15 GMT

फाइल फोटो 

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। उपराज्यपाल द्वारा नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन की सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद दिल्ली सरकार ने शहर में खुदरा शराब बिक्री की पुरानी व्यवस्था को फिर से अपनाने का फैसला किया है।अभी तक आबकारी नीति 2021-22 को 31 मार्च के बाद दो बार दो-दो महीने की अवधि के लिए बढ़ाया गया था, जो 31 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। सरकार इसे अब आगे नहीं बढ़ाएगी।एक अगस्त से दिल्ली में सरकार पूर्व की तरह फिर से शराब बेचेगी।

सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बृहस्पतिवार को आबकारी विभाग को 2022-23 की नई आबकारी नीति आने तक छह महीने की अवधि के लिए 2021-22 से पहले वाली नीति की पुरानी व्यवस्था को वापस लागू करने का निर्देश दिया है।
जिसके तहत शराब को सरकार द्वारा स्वयं बेेचे जाने की बात है।एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार वित्त विभाग ने आबकारी आयुक्त को 17 नवंबर 2021 से नई आबकारी नीति लागू होने से पहले दिल्ली सरकार के चार निगमों के प्रमुखों के साथ उनके द्वारा संचालित शराब की दुकानों के विवरण के लिए समन्वय करने का निर्देश दिया है।
वित्त विभाग ने 28 जुलाई को जारी आदेश में आबकारी विभाग से शुक्रवार शाम तक पुरानी दुकानों का विवरण सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में लिया है।जिसमें दुकान का स्थान, तैनात कर्मचारियों की संख्या, दुकान किराये पर थी या सरकारी परिसर में थी। यह जानकारी एकत्रित की है। ये निगम 17 नवंबर 2021 से पहले दिल्ली में शराब बेचते थे।अलग अलग संख्या में इन निगमों की शहर में दुकानें थीं।
जो चार निगम हैं उनमें दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआइआइडीसी), दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी), दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक स्टोर (डीसीसीडब्ल्यूएस) और दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (डीएससीएससी) शामिल हैं। आबकारी नीति 2021-22 के लागू हाेने से कुछ दिन पहले ही शहर में इन चारों निगमों की दुकानों पर दिल्ली सरकार द्वारा शराब की खुदरा बिक्री बंद कर दी गई थी।
उस समय आबकारी नीति 2021-22 के तहत शराब बिक्री का कार्य दिल्ली सरकार ने निजी हाथों में दे दिया था।निजी फर्मों को खुली बोली के जरिए 849 शराब ठेकों के लाइसेंस जारी किए गए थे।शहर को 32 क्षेत्रों में विभाजित किया गया था, जिनमें से प्रत्येक में अधिकतम 27 विक्रेता थे।
व्यक्तिगत लाइसेंस के बजाय बोली क्षेत्र-वार की गई थी और प्रत्येक बोलीदाता को अधिकतम दो क्षेत्रों के लिए बोली लगाने की अनुमति दी गई थी।इनमें दो कंपनियों ने दो दो जोन भी उच्च बोली लगाकर लिए थे।हालांकि कुछ कंपनियों नें 31 मार्च 2022 को लाइसेंस वापस कर दिए थे।इससे पहले चार सरकारी निगम दिल्ली में कुल 864 में से 475 शराब की दुकान चलाते थे।निजी स्टोर, व्यक्तियों के पास लाइसेंस की संख्या 389 थी।
उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने इस महीने की शुरुआत में आबकारी नीति के कार्यान्वयन में नियमों के कथित उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों की सीबीआइ जांच की सिफारिश की थी।उन्होंने मुख्य सचिव नरेश कुमार को कथित अनियमितताओं में आबकारी विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच के साथ-साथ बोली के माध्यम से खुदरा शराब लाइसेंस जारी करने में कार्टेलाइजेशन की शिकायत का भी जांच का निर्देश दिया है।
आबकारी विभाग अभी आबकारी नीति 2022-23 पर काम कर रहा है, जिसमें अन्य बातों के अलावा दिल्ली में शराब की होम डिलीवरी की सिफारिश भी योजना भी शाामिल है।अधिकारियों ने कहा कि मसौदा नीति को उपराज्यपाल वी के सक्सेना को उनकी मंजूरी के लिए भेजा जाना बाकी है।
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