नई दिल्ली : भू-राजनीतिक मामलों पर अपने विश्लेषण के कारण सोशल मीडिया पर चर्चित चीनी मूल के कनाडाई शिक्षक और टिप्पणीकार जियांग ज्यूकिन ने परमाणु हथियारों के संभावित इस्तेमाल को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका अनुमान है कि भविष्य में किसी देश ने परमाणु हथियार का पहले इस्तेमाल किया तो पाकिस्तान इसकी सबसे अधिक आशंका वाले देशों में शामिल हो सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि निकट भविष्य में परमाणु युद्ध होने की संभावना बेहद कम है।
जियांग ने यह टिप्पणी यूट्यूबर राज शमानी के पॉडकास्ट में विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के दौरान की। उनसे पूछा गया था कि यदि भविष्य में परमाणु हथियार का इस्तेमाल होता है तो कौन-सा देश पहले ऐसा कदम उठा सकता है। जवाब में उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष का उल्लेख किया और पाकिस्तान को अधिक संभावित देश बताया। यह जियांग का निजी भू-राजनीतिक आकलन है, किसी सरकार या अंतरराष्ट्रीय संस्था का निष्कर्ष नहीं।
परमाणु युद्ध की आशंका बेहद कम
जियांग ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं लगता कि वर्तमान पीढ़ी के जीवनकाल में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होगा। उनके अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में परमाणु हथियारों के प्रयोग के विरुद्ध एक मजबूत वैश्विक मान्यता विकसित हुई है।
उनका कहना था कि परमाणु हमला करने वाले देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर प्रतिबंधों, राजनयिक अलगाव और जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके विनाशकारी परिणामों को देखते हुए किसी भी सरकार के लिए ऐसा निर्णय लेना अत्यंत कठिन होगा। इसी वजह से उन्होंने परमाणु युद्ध की आशंका को लगभग शून्य बताया।
 पाकिस्तान का नाम लेने के पीछे बताई वजह
जियांग ने पाकिस्तान का नाम लेते हुए उसके राजनीतिक, आर्थिक और संस्थागत हालात का उल्लेख किया। उन्होंने पाकिस्तान को परमाणु हथियारों से संपन्न, लेकिन आंतरिक चुनौतियों से जूझता देश बताया। उनका तर्क था कि किसी बड़े आपातकाल या गंभीर सैन्य संघर्ष में कमजोर संस्थागत नियंत्रण के कारण जोखिम बढ़ सकता है।
उन्होंने पाकिस्तान में राजनीतिक विभाजन, आर्थिक परेशानियों और भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि गंभीर संकट की स्थिति में वहां निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। जियांग के अनुसार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की कोई स्थिति बनी तो उसका सबसे संभावित केंद्र भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष हो सकता है।
जियांग ने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य रणनीति में परमाणु हथियारों को भारत की बड़ी पारंपरिक सैन्य क्षमता के मुकाबले एक प्रतिरोधक शक्ति के रूप में देखा जाता है। उनके आकलन में यदि पाकिस्तान की पारंपरिक सेनाएं किसी संघर्ष में कमजोर स्थिति में पहुंचती हैं तो परमाणु विकल्प की चर्चा तेज हो सकती है। [इंडिया टुडे](https://www.indiatoday.in/india/story/pakistan-nuclear-weapons-first-asim-munir-use-professor-jiang-raj-shamani-podcast-prediction-2970085-2026-08-13) ने भी पॉडकास्ट में दिए गए उनके बयान को प्रकाशित किया है।
भारत की परमाणु नीति का किया उल्लेख
जियांग ने अपने विश्लेषण में भारत की नो फर्स्ट यूज नीति का भी उल्लेख किया। इस नीति का सामान्य अर्थ यह है कि भारत किसी संघर्ष में पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा, लेकिन परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखेगा।
उन्होंने कहा कि भारत के पास परमाणु हथियारों के अतिरिक्त मजबूत पारंपरिक सैन्य क्षमताएं भी हैं। इसलिए भारत पर उस तरह का रणनीतिक दबाव नहीं है, जैसा उनके आकलन में पाकिस्तान पर किसी बड़े सैन्य संकट के दौरान हो सकता है।
जियांग का बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग उनके तर्कों को दक्षिण एशिया की परमाणु प्रतिरोध रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे अनुमान आधारित और अत्यधिक सरलीकृत विश्लेषण मान रहे हैं। परमाणु हथियारों से जुड़े वास्तविक निर्णय अत्यंत गोपनीय कमान प्रणालियों, सैन्य सिद्धांतों और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। इसलिए किसी देश के संभावित कदम के बारे में निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
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