पेपर लीक मामलों पर जयराम रमेश का हमला, MH-CET और 12वीं रिजल्ट में अंतर का लगाया आरोप
New Delhi : कांग्रेस के सीनियर नेता और सांसद जयराम रमेश ने गुरुवार को केंद्र सरकार के प्रस्तावित 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से भारत की शिक्षा व्यवस्था की गहरी समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
रमेश ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में सिर्फ़ "पहला कदम" है। उन्होंने महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (MH-CET) के नतीजों और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के स्कोर के बीच कथित अंतर पर भी सवाल उठाए।
रमेश ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "भारत की शिक्षा व्यवस्था अंदर से खोखली हो चुकी है और शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा इसकी विश्वसनीयता बहाल करने की लंबी प्रक्रिया का बस पहला कदम है।"
MH-CET के नतीजों का ज़िक्र करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि पिछले तीन सालों में एंट्रेंस एग्ज़ाम और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में छात्रों के प्रदर्शन के बीच अंतर देखा गया है।
उन्होंने कहा, "पिछले तीन सालों से इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (MH-CET) के नतीजों और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के स्कोर के बीच साफ़ अंतर दिख रहा है।"
उन्होंने आगे कहा, "MH-CET में टॉप रैंक पाने वाले छात्र अपनी बोर्ड परीक्षाओं में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। क्या इसके पीछे कोई गड़बड़ी है? या इसकी वजह यह है कि कोचिंग कल्चर स्कूल-आधारित शिक्षा पर हावी होता जा रहा है? हमें इन सवालों पर गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है।"
रमेश ने कहा, "पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का कानून पास करना कोई समाधान नहीं है। यह उन लाखों युवाओं की भावनाओं और उनके जायज़ गुस्से का अपमान है जो हाल के महीनों में सड़कों पर उतरे हैं।"
रमेश की ये टिप्पणियां तब आईं जब गुरुवार को राज्यसभा में 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पर चर्चा हुई। इससे एक दिन पहले लोकसभा ने पेपर लीक और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के ख़िलाफ़ कथित पुलिस कार्रवाई पर लंबी बहस के बाद इस बिल को मंज़ूरी दी थी।
इस बिल का मकसद दोषियों के लिए सज़ा बढ़ाकर परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ कानूनी ढांचे को मज़बूत करना है। इसमें कम से कम पाँच साल की जेल की सज़ा का प्रस्ताव है, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और व्यक्तियों के लिए अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रावधान है।
परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों के लिए, प्रस्तावित कानून में न्यूनतम जेल की सज़ा को सात साल (जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है) करने और अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
इस कानून में पेपर लीक मामलों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स के गठन, दो महीने के भीतर जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रावधान है।