नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान एक ईरानी पत्रकार की पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेकर की गई टिप्पणी चर्चा में आ गई है। सम्मेलन को कवर करने पहुंचे ईरानी पत्रकार बसीम लालेह ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और कूटनीतिक भूमिका की प्रशंसा करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष को रुकवाने का श्रेय लेने की पाकिस्तान की कोशिश वास्तविकता से मेल नहीं खाती।

बसीम लालेह ने आसिम मुनीर को संबोधित करते हुए कहा, “मिस्टर मुनीर, यू आर फायर्ड”, जिसका हिंदी में अर्थ है—“मुनीर, आपकी छुट्टी हो गई है।” पत्रकार की यह टिप्पणी सोशल मीडिया और भारतीय समाचार माध्यमों में तेजी से प्रसारित हुई। इसे पाकिस्तान के उन दावों पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें इस्लामाबाद ने ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की बात कही थी।

लालेह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत किसी अन्य देश के माध्यम से ईरान से संवाद नहीं करता। भारत और ईरान के बीच सीधे राजनयिक संबंध हैं तथा दोनों देश आपसी हितों से जुड़े विषयों पर स्वतंत्र रूप से बातचीत कर सकते हैं। उन्होंने यह राय भी रखी कि क्षेत्रीय संकट के समाधान में पाकिस्तान के मुकाबले भारत ज्यादा भरोसेमंद और प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है। यह ईरानी पत्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणी है, इसे ईरान सरकार का आधिकारिक बयान नहीं माना जाना चाहिए।

BRICS सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति प्रमुख विषयों में शामिल रही। सदस्य देशों की ओर से स्वीकार किए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में क्षेत्र में बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। देशों से अधिकतम संयम बरतने तथा विवादों को बातचीत, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से हल करने की अपील की गई। घोषणापत्र में नागरिकों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और मानवीय सहायता की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी नई दिल्ली घोषणापत्र में संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान और मध्यस्थता पर जोर दिया गया है।

सम्मेलन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात का साझा घोषणापत्र पर सहमत होना भी शामिल रहा। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क हुआ। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद मध्य पूर्व की स्थिति पर संयम और बहुपक्षीय समाधान की अपील करने वाला साझा वक्तव्य स्वीकार किया गया। इससे भारत की मेजबानी में अलग-अलग राजनीतिक हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने की क्षमता सामने आई। घोषणापत्र तैयार करना चुनौतीपूर्ण था क्योंकि समूह में ईरान के साथ अमेरिका का करीबी सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में कहा कि BRICS किसी पश्चिमी देश या समूह के विरोध में खड़ा संगठन नहीं है। उन्होंने इसे वैश्विक दक्षिण के देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अधिक भागीदारी दिलाने वाला मंच बताया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता दोहराते हुए विकासशील देशों को निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग रखी।

सम्मेलन में चीन, रूस और ईरान जैसे देशों की भागीदारी के बीच भारत ने संतुलित विदेश नीति का संदेश देने की कोशिश की। प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय संवाद किया। पश्चिम एशिया और यूक्रेन से जुड़े संघर्षों पर भारत ने सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत तथा कूटनीति को प्राथमिकता देने का अपना पुराना रुख दोहराया। भारत का कहना रहा है कि स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।

हालांकि, यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि भारत ने रूस और यूक्रेन का युद्ध “रुकवा दिया” है। दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त कराने के लिए भारत लगातार बातचीत, कूटनीतिक संपर्क और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों पक्षों के नेतृत्व से संपर्क भी किया है, लेकिन युद्ध समाप्त होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए भारत की भूमिका को शांति प्रयासों और संवाद को बढ़ावा देने तक सीमित शब्दों में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

इसी तरह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम कराने में पाकिस्तान की वास्तविक भूमिका को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताता रहा है, लेकिन ईरानी पत्रकार बसीम लालेह ने इन दावों को खारिज किया। पत्रकार की टिप्पणी से यह संकेत जरूर मिलता है कि पाकिस्तान की भूमिका को लेकर ईरान के भीतर सभी वर्ग एक जैसी राय नहीं रखते। इसके बावजूद किसी पत्रकार के बयान को ईरान सरकार की आधिकारिक नीति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

BRICS शिखर सम्मेलन के साझा घोषणापत्र से यह स्पष्ट हुआ कि भारत ने किसी एक शक्ति खेमे के पक्ष में जाने के बजाय बहुपक्षीय संवाद, रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों पर आधारित कूटनीति को प्राथमिकता दी। भारत ने चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देश के साथ मंच साझा करते हुए सहमति बनाने का प्रयास किया और रूस, ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात के साथ भी संवाद जारी रखा।

बसीम लालेह की आसिम मुनीर पर टिप्पणी भले ही सुर्खियों में हो, लेकिन सम्मेलन का बड़ा संदेश यह रहा कि गंभीर अंतरराष्ट्रीय विवादों में सैन्य टकराव के स्थान पर बातचीत की गुंजाइश बनाए रखी जाए। भारत ने मेजबान देश के रूप में अलग-अलग हितों वाले सदस्य देशों को साझा घोषणापत्र पर सहमत कराकर अपनी कूटनीतिक सक्रियता प्रदर्शित की।

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