नई दिल्ली। परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले के विरोध में निकाले गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने के मामले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में उस रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान की पहचान कर ली गई है, जिसने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से फायरिंग की थी। जांच में सामने आया है कि संबंधित जवान ने कुल सात राउंड फायर किए थे, जिनमें से पांच राउंड प्रदर्शनकारियों को लगे, जबकि दो राउंड जमीन पर जाकर लगे।
सीआरपीएफ की आंतरिक जांच टीम इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान फायरिंग करने वाले जवान की पहचान की गई है और अब यह पता लगाया जा रहा है कि किन परिस्थितियों में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। जांच टीम यह भी देख रही है कि मौके पर मौजूद अधिकारियों के निर्देश क्या थे और बल प्रयोग की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार थी या नहीं।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरी घटना दिल्ली के कनॉट प्लेस क्षेत्र में हुई थी, जहां छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च निकालने की कोशिश की थी। प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि उन पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
छात्र संगठनों का कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कई प्रदर्शनकारी पैलेट से घायल हुए। हालांकि, शुरुआती दौर में दिल्ली पुलिस की ओर से पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया गया था। इसके बाद मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया और विपक्षी दलों ने भी संसद तथा सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे को उठाया।
घटना के बाद अस्पतालों में पहुंचे कुछ घायल प्रदर्शनकारियों की जांच में पैलेट से लगी चोटों की पुष्टि हुई थी। सफदरजंग अस्पताल में एक घायल व्यक्ति के शरीर पर पैलेट के निशान पाए गए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब सीआरपीएफ की जांच में पैलेट गन चलाने वाले जवान की पहचान होने से मामले में नया मोड़ आ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ की जांच रिपोर्ट करीब एक सप्ताह के भीतर आने की संभावना है। रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि संबंधित जवान की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं। अगर जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
घटना के बाद रैपिड एक्शन फोर्स ने अपने जवानों के लिए कुछ नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। आरएएफ की महानिरीक्षक सीमा ढूंढिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली में अगले आदेश तक कुछ हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें प्रोजेक्टाइल एक्शन गन (PAG), एंटी रायट गन (ARG), इलेक्ट्रिक शॉक हथियार और इलेक्ट्रिक शील्ड शामिल हैं।
बैठक में यह भी कहा गया कि जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान बल प्रयोग की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार नहीं रही। अधिकारियों ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में संसद मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी और मामला हिंसक हो गया।
फिलहाल सीआरपीएफ की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट होगा कि पैलेट गन चलाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और क्या जवान ने तय नियमों का पालन किया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।