Noida नोएडा : नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2021 में इंडोर स्टेडियम के संचालन के लिए जारी किए गए टेंडर को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कुछ दस्तावेज सामने आने और लगाए गए आरोपों के बाद इसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि टेंडर हासिल करने वाली कंपनी सिक्योरिटी सॉल्यूशंस और पूर्व भारतीय क्रिकेटर आरपी सिंह से जुड़े पक्ष ने कथित तौर पर गलत जानकारियों और दस्तावेजों के आधार पर तकनीकी मूल्यांकन में लाभ हासिल किया।
मामले में आरोप लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कंपनी की ओर से प्रस्तुत किए गए अनुभव प्रमाणपत्र, कोच प्रोफाइल और अन्य दस्तावेजों में कथित अनियमितताएं थीं। आरोपों के मुताबिक, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कंपनी को तकनीकी मूल्यांकन में अधिक अंक मिले और वह टेंडर हासिल करने में सफल रही।
बताया जा रहा है कि कंपनी ने अपने अनुभव को साबित करने के लिए नोएडा सेक्टर-93 स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट से जुड़ा एक अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। अब इसी प्रमाणपत्र की सत्यता और उपयोगिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया में पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती गई, जिसके चलते टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हुई।
विवाद का एक अन्य पहलू कोच प्रोफाइल से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर के तकनीकी मूल्यांकन के दौरान जिन प्रशिक्षकों और विशेषज्ञों का विवरण प्रस्तुत किया गया, उनमें से कुछ जानकारियों की प्रमाणिकता पर संदेह है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यदि दस्तावेजों की सही तरीके से जांच की जाती तो कंपनी को मिलने वाले तकनीकी अंक प्रभावित हो सकते थे।
इस पूरे मामले ने नोएडा प्राधिकरण की टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या टेंडर जारी करने से पहले सभी दस्तावेजों की गहन जांच की गई थी या नहीं। हालांकि, अभी तक प्राधिकरण की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि नोएडा इंडोर स्टेडियम शहर की खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। इसके संचालन और प्रबंधन के लिए निजी संस्था को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। टेंडर के माध्यम से चयनित संस्था को स्टेडियम की गतिविधियों, खेल प्रशिक्षण और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन करना था।
अब सामने आए आरोपों के बाद मामले की जांच और दस्तावेजों की समीक्षा की मांग उठ रही है। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पूरा मामला आरोपों और दस्तावेजों की जांच के दायरे में है। आने वाले दिनों में नोएडा प्राधिकरण की ओर से इस संबंध में कोई कदम उठाया जाता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।