ग्लोबल साउथ को आत्मनिर्भर बनाने की सोच रखता है India

Update: 2025-02-27 13:43 GMT
New Delhi। अफ्रीका के प्रति भारत का दृष्टिकोण दीर्घकालिक, पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी स्थापित करने की मजबूत प्रतिबद्धता से प्रेरित रहा है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को किसी देश का नाम लिए बिना विस्तारवादी नीति पर चलने वाले अपने पड़ोसी देश पर कटाक्ष करते हुए स्पष्ट किया कि भारत का अफ्रीका के साथ जुड़ाव महज कुछ हासिल करने के लिए नहीं है, बल्कि भारत का ध्यान क्षमता निर्माण, कौशल विकास और तकनीकी स्थानांतरण पर है, ताकि अफ्रीकी देश आत्मनिर्भर बन सकें।
जयशंकर ने जापान-भारत-अफ्रीका फोरम की बैठक को वर्चुअली संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने ग्लोबल साउथ (गरीब एंव विकासशील देश) के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा जैसे-जैसे ग्लोबल साउथ आर्थिक विकास के भविष्य के चालक के रूप में उभर रहा है, यह जरूरी है कि हम सुनिश्चित करें कि इसकी आकांक्षाओं और हितों का वैश्विक मंच पर पूरी तरह से प्रतिनिधित्व हो। भारत ने लगातार इस मुद्दे को आगे बढ़ाया है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक जयशंकर ने आगे कहा कि भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम, पैन-अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना और उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजनाओं (एचआईसीडीपी) जैसी हमारी पहलों ने जरूरतमंद अफ्रीकी देशों में शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल बुनियादी ढांचे में स्थानीय क्षमताओं को मजबूत किया है। भारत अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 अरब डॉलर पहुंच गया है। भारत ने अफ्रीका की कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें 12 अरब डॉलर से अधिक रियायती ऋण और रेलवे, बिजली उत्पादन, कृषि तथा जलापूर्ति जैसे क्षेत्रों में पूरे महाद्वीप में फैली 200 से अधिक पूरी की गई परियोजनाएं शामिल हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और जापान अफ्रीकी देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण एवं उभरते क्षेत्रों में लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए सहयोग कर सकते हैं।
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