नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (UN) के नए विश्व नक्शे को लेकर भारत में बहस तेज हो गई है। जिस नक्शा सुधार प्रस्ताव का भारत ने समर्थन किया था, उसी के बाद सामने आए एक नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, नए नक्शे में इन क्षेत्रों को लेकर अलग-अलग दावे और सीमांकन रेखाएं दिखाई गई हैं, जिसे भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता के नजरिए से संवेदनशील मानता है।
हालांकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का समर्थन किसी खास नक्शे या भारत की सीमाओं पर किसी बदलाव की मंजूरी नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की संप्रभुता और आधिकारिक सीमाओं को लेकर देश की स्थिति पहले की तरह स्पष्ट और अडिग है।
आखिर क्या था संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शों को ज्यादा संतुलित और वास्तविक रूप से दिखाने के लिए एक प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसका मुख्य उद्देश्य पुराने **मर्केटर प्रोजेक्शन** की जगह ऐसी नक्शा प्रणाली को बढ़ावा देना है, जिसमें देशों और महाद्वीपों के वास्तविक आकार को बेहतर तरीके से दिखाया जा सके।
इस प्रस्ताव को अफ्रीकी देशों की पहल पर आगे बढ़ाया गया था। इसमें दुनिया के नक्शों में मौजूद असमानताओं को दूर करने और भौगोलिक प्रतिनिधित्व को अधिक सटीक बनाने की बात कही गई। भारत समेत बड़ी संख्या में देशों ने इसका समर्थन किया।
भारत ने समर्थन क्यों किया?
भारत का कहना था कि नक्शों में दुनिया के देशों और क्षेत्रों का सही प्रतिनिधित्व होना चाहिए। पुराने नक्शों में कई जगह आकार को लेकर भ्रम पैदा होता है, खासकर ध्रुवीय क्षेत्रों और भूमध्य रेखा के आसपास के इलाकों में।
भारत ने इस व्यापक उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय नक्शे में भारत की सीमाओं का चित्रण आधिकारिक भारतीय मानचित्र के अनुसार ही होना चाहिए।
अरुणाचल और अक्साई चिन पर क्यों मचा विवाद?
विवाद उस समय शुरू हुआ जब नए नक्शे में भारत-चीन सीमा से जुड़े क्षेत्रों को लेकर अलग-अलग दावे वाली रेखाएं दिखाई देने की बात सामने आई। इसमें अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर सवाल उठे।
भारत अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि चीन लंबे समय से इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है। इसी तरह अक्साई चिन को लेकर भी भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है।
भारत ने क्या कहा?
भारत ने इस मामले में अपना रुख साफ करते हुए कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज या नक्शे में भारत के क्षेत्रों को गलत तरीके से दिखाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव का समर्थन केवल नक्शा बनाने की बेहतर प्रणाली के लिए था, न कि किसी विवादित दावे को मान्यता देने के लिए।
सरकार का कहना है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर भारत की आधिकारिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है।
चीन के साथ पुराना सीमा विवाद
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर मतभेद रहे हैं। 1962 के युद्ध के बाद से अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को लेकर दोनों देशों के दावे अलग-अलग रहे हैं।
अक्साई चिन पर चीन का नियंत्रण है, जबकि भारत इसे लद्दाख का हिस्सा मानता है। वहीं अरुणाचल प्रदेश पर चीन अपना दावा जताता है, जिसे भारत पूरी तरह खारिज करता है।
क्या बदल जाएगा भारत की स्थिति पर?
विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से किसी देश की सीमाओं को बदलने वाला फैसला नहीं है। यह केवल नक्शा तैयार करने के तरीके और भौगोलिक प्रस्तुति से जुड़ा है।
इसलिए भारत के लिए सबसे अहम बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके आधिकारिक सीमांकन को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए। भारत लगातार यही रुख अपनाता रहा है कि उसकी क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर है कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं नए नक्शा मानकों को किस तरह लागू करती हैं। भारत की कोशिश रहेगी कि किसी भी वैश्विक नक्शे में उसकी सीमाओं और क्षेत्रों का चित्रण आधिकारिक स्थिति के अनुसार हो।
फिलहाल यह मामला एक बार फिर भारत-चीन सीमा विवाद और अंतरराष्ट्रीय नक्शों की भूमिका को लेकर चर्चा में आ गया है। भारत ने साफ कर दिया है कि नक्शा सुधार के समर्थन का मतलब अपनी सीमाओं से जुड़े दावों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं है।