नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर विपक्ष और केंद्र में सत्तारूढ़ BJP के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। INDIA गठबंधन की पार्टियों ने बुधवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई समन्वय बैठक के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को वापस लेने और भविष्य के चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की जगह मतपत्र के इस्तेमाल की मांग उठाई। गठबंधन ने इन मुद्दों को लेकर देशव्यापी विरोध कार्यक्रम की भी घोषणा की है।
बैठक करीब साढ़े तीन घंटे चली। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, RJD नेता तेजस्वी यादव, NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR, मतदाता सूची और EVM से जुड़े विपक्ष के सवालों पर संयुक्त रणनीति बनाने पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि INDIA गठबंधन की पार्टियों ने चुनाव संबंधी मुद्दों पर संयुक्त रूप से आंदोलन करने का फैसला किया है। गठबंधन की प्रमुख मांगों में SIR से पहले की मतदाता सूचियों के इस्तेमाल, मतदाता सूची में अधिक पारदर्शिता और चुनाव मतपत्र से कराने की मांग शामिल है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। ये विपक्षी दलों की राजनीतिक मांगें हैं और चुनाव आयोग ने अपने ऊपर लगाए गए पक्षपात के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
खड़गे ने घोषणा की कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर के बीच देशभर में जिला स्तर पर “लोकतंत्र बचाओ मार्च” आयोजित किए जाएंगे। इसमें INDIA गठबंधन के कार्यकर्ताओं के साथ युवाओं और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ने की योजना है। कई जिलों में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों के सामने प्रदर्शन भी किए जाएंगे।
इसके बाद 6 अक्टूबर को विपक्षी दलों के सांसद नई दिल्ली में चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। विपक्ष का कहना है कि इस दौरान SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल चुनाव आयोग के सामने रखे जाएंगे। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में INDIA गठबंधन के नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से समय मांगकर उनसे मुलाकात करने की भी तैयारी कर रहे हैं। विपक्षी नेता राष्ट्रपति के सामने चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी चिंताएं रखने की बात कह रहे हैं।
SIR को लेकर विपक्ष पिछले कई महीनों से सवाल उठा रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की जरूरत है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित अंतिम फैसले आयोग की सामूहिक और सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए। आयोग ने यह भी कहा है कि मतदाता सूची संशोधन का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है।
हाल में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की खबरें सामने आने के बाद यह विवाद और बढ़ा था। आयोग ने बाद में स्पष्ट किया कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आ सकती है, लेकिन SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने कुछ प्रक्रियाओं में बदलाव करते हुए बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर जाकर दस्तावेज एकत्र करने जैसी व्यवस्था भी लागू की है।
INDIA गठबंधन की ओर से EVM की जगह मतपत्र से चुनाव कराने की मांग पर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। खड़गे ने बैठक के बाद कहा कि गठबंधन के दल इस मुद्दे पर एकमत हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि मतपत्र से चुनाव कराने से मतदाताओं के बीच भरोसा बढ़ेगा। हालांकि चुनाव कराने की प्रक्रिया और तकनीक से जुड़े फैसले चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
विपक्ष के इस अभियान पर BJP ने पलटवार किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव में जीत मिलने पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की तारीफ करता है और हारने पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है। उन्होंने विपक्ष के विरोध कार्यक्रम को चुनावी हार की आशंका से पहले बनाया जा रहा राजनीतिक बहाना बताया। ये BJP और चौहान के राजनीतिक आरोप हैं।
मतपत्र की मांग पर चौहान ने कहा कि चुनाव किस प्रणाली से कराया जाना है, इस पर फैसला चुनाव आयोग को करना है क्योंकि वह एक संवैधानिक संस्था है। उन्होंने INDIA गठबंधन के “लोकतंत्र बचाओ” अभियान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन लोकतंत्र के बजाय अपने राजनीतिक हितों को बचाने के लिए है। विपक्ष ने इस आरोप को स्वीकार नहीं किया है।
BJP के अन्य नेताओं ने भी INDIA गठबंधन की बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग और दूसरी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर अनावश्यक सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर INDIA गठबंधन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
बैठक के बाद राहुल गांधी ने विपक्षी दलों को संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की बात कही। विपक्ष ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार और BJP ने इन आरोपों को खारिज किया है। चुनाव आयोग भी अपने फैसलों को नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप बताता रहा है।
अब 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला जिला स्तरीय “लोकतंत्र बचाओ मार्च” इस राजनीतिक विवाद का अगला चरण होगा। 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक सांसदों के प्रस्तावित मार्च और इसके बाद राष्ट्रपति से मुलाकात की योजना के साथ INDIA गठबंधन ने साफ कर दिया है कि वह SIR, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में उठाएगा।
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