नई दिल्ली। चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया और आयोग के कामकाज को लेकर चल रही बहस के बीच 30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक होने की संभावना है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शनिवार को बताया कि यह बैठक नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि बैठक में SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए।
भट्टाचार्य ने इस चर्चा को केवल राजनीतिक दलों तक सीमित रखने के बजाय इसमें विपक्षी दलों के साथ सिविल सोसाइटी के सदस्यों और संबंधित नागरिकों को भी शामिल करने की बात कही। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जरूरत है।यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित आंतरिक मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, अपील की प्रक्रिया तथा मतदाता डेटा से जुड़े डिजिटल सिस्टम जैसे मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को लेकर प्रक्रिया और अधिकार से संबंधित सवाल उठाए थे।'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियां अलग-अलग मौकों पर सामने आईं और कुछ मामलों में उन्होंने कहा कि निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ आपत्तियां एक ही दिन में दर्ज की गई थीं।
रिपोर्ट में बताया गया कि SIR से जुड़े मुद्दों में नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव भी शामिल था। रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं से पिछली SIR की मतदाता सूची में स्वयं या माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से संबंधित जानकारी मांगी जाने लगी थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी।
इसके अलावा मतदाता डेटा के डिजिटल सिस्टम के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और उसके प्रबंधन को लेकर अपनी चिंताएं दर्ज की थीं। कुछ मामलों में उन्होंने इन मुद्दों को कैबिनेट सचिव के समक्ष भी उठाया।SIR प्रक्रिया को लेकर पहले से ही राजनीतिक दलों के बीच बहस चल रही है। विपक्षी दलों की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, नामों के जुड़ने और हटने तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। वहीं चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा है कि आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं।
इस तरह एक ओर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई कथित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है, तो दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है। यही विरोधाभासी दावे मौजूदा विवाद का एक प्रमुख हिस्सा हैं।दीपांकर भट्टाचार्य ने ऐसे समय में व्यापक बैठक की जरूरत बताई है। उनके अनुसार, SIR जैसे मुद्दे का असर सीधे मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़ा है। इसलिए इस पर केवल राजनीतिक दलों के बीच ही नहीं, बल्कि नागरिक समाज और संबंधित नागरिकों के साथ भी चर्चा होनी चाहिए।
प्रस्तावित INDIA गठबंधन की बैठक में SIR प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है। इसमें मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े सवाल शामिल हो सकते हैं। हालांकि बैठक का अंतिम एजेंडा और इसमें शामिल होने वाले सभी दलों या संगठनों की आधिकारिक सूची अभी स्पष्ट नहीं है।SIR को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण का मुद्दा महत्वपूर्ण है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रक्रिया बिहार में जून 2025 में शुरू हुई थी और बाद में कई राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों तक इसका विस्तार हुआ। रिपोर्ट में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का उल्लेख किया गया है।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण SIR को लेकर राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों और मतदाताओं के बीच चर्चा बनी हुई है। चुनाव आयोग की ओर से इस प्रक्रिया को मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की कवायद के रूप में देखा जाता है, जबकि विपक्षी दल इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं।इस बीच, चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट ने बहस को एक और आयाम दिया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, संधू और जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, आयोग से जुड़े अधिकारियों ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा कि SIR समेत सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी।
भट्टाचार्य का कहना है कि ऐसे मुद्दों पर व्यापक स्तर पर चर्चा की जरूरत है। उन्होंने विपक्षी दलों के साथ सिविल सोसाइटी और संबंधित नागरिकों की भागीदारी पर जोर दिया है। 30 सितंबर को प्रस्तावित बैठक होती है तो इसमें SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच आगे की रणनीति और चर्चा का रास्ता तय हो सकता है।फिलहाल 30 सितंबर की बैठक को लेकर अंतिम आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। वहीं SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्टों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं। चुनाव आयोग की ओर से सामने आया पक्ष भी इस बहस का हिस्सा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बैठक और संबंधित पक्षों के बयानों से इस मुद्दे पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।