नई दिल्ली। सत्य निकेतन में पेइंग गेस्ट (PG) बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अनधिकृत निर्माण और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल अनुपालन हलफनामे के अनुसार, 6 सितंबर से 23 सितंबर 2026 के बीच 17 दिनों में MCD ने 543 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की और 178 अन्य संपत्तियों को सील किया। इसी अवधि में अनधिकृत निर्माण को लेकर 354 कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए।MCD की ओर से कार्यकारी अभियंता (भवन) मुख्यालय अजय कुमार जैन ने 24 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट में यह अनुपालन हलफनामा दाखिल किया। इसमें नागरिक निकाय की ओर से सत्य निकेतन हादसे के बाद की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब हादसे के बाद दिल्ली में PG आवासों और अनधिकृत निर्माण की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
हलफनामे के मुताबिक, 6 सितंबर से 23 सितंबर के बीच MCD ने केवल ध्वस्तीकरण और सीलिंग ही नहीं की, बल्कि आगे की कार्रवाई के लिए भी बड़ी संख्या में नोटिस और आदेश जारी किए। इस दौरान सीलिंग के लिए 205 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जबकि 98 ध्वस्तीकरण आदेश भी पारित किए गए। ये आंकड़े सत्य निकेतन हादसे के बाद शहर में तेज किए गए प्रवर्तन अभियान की व्यापकता को दिखाते हैं।सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत 6 सितंबर को गिर गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद PG भवनों की सुरक्षा, निर्माण में किए गए बदलाव और भवन नियमों के अनुपालन का मुद्दा दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा। दिल्ली पुलिस ने भी अदालत में दाखिल अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा है कि इमारत के मालिकों ने मरम्मत और संरचनात्मक बदलाव से पहले किसी योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर या आर्किटेक्ट की सलाह नहीं ली थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए MCD को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने MCD को सत्य निकेतन की संबंधित इमारतों की अनुमति और स्वीकृति की स्थिति की जांच करने को कहा था। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि अगर भवनों का निर्माण कानूनी अनुमति के बिना या लागू बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।हाई कोर्ट ने MCD को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले PG हॉस्टलों का निरीक्षण करने का निर्देश भी दिया था। निगम को यह पता लगाने को कहा गया था कि PG के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारतों के पास जरूरी अनुमतियां हैं या नहीं और क्या वहां स्वीकृत भवन योजना या बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन किया गया है। इसके साथ ही इन PG में रहने वाले छात्रों की संख्या की जानकारी भी अदालत के सामने रखने को कहा गया था।
हादसे के तुरंत बाद ही MCD ने दिल्ली के सभी 12 जोन में अनधिकृत निर्माण और भवन नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी थी। 9 सितंबर तक निगम 58 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और 24 संपत्तियों को सील कर चुका था। उस समय 57 कारण बताओ नोटिस अनधिकृत निर्माण के लिए और 33 नोटिस सीलिंग के लिए जारी किए गए थे।इसके बाद अभियान लगातार आगे बढ़ता गया। 18 सितंबर तक MCD के आंकड़ों में ध्वस्तीकरण कार्रवाई वाली संपत्तियों की संख्या 397 और सील की गई संपत्तियों की संख्या 152 तक पहुंच गई थी। अब हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में 23 सितंबर तक की कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा सामने आया है, जिसमें 543 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण और 178 संपत्तियों की सीलिंग की बात कही गई है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने PG भवनों का शहरव्यापी सर्वे भी शुरू किया। शुरुआती सर्वे में 1,252 PG भवनों में करीब 24 हजार लोगों के रहने की जानकारी सामने आई थी। इनमें 39 इमारतों को मामूली मरम्मत, नौ को बड़ी मरम्मत की जरूरत वाला और तीन को खतरनाक श्रेणी में चिह्नित किया गया था।हाई कोर्ट की कार्यवाही में PG आवासों की सुरक्षा के साथ दिल्ली में बाहर से पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधाओं का मुद्दा भी उठा है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बाहर से आने वाले विद्यार्थियों की संख्या और विश्वविद्यालय तथा सरकार की ओर से संचालित हॉस्टलों की क्षमता की जानकारी देने को कहा था। अदालत ने इस मामले को छात्र सुरक्षा और PG आवासों के नियमन से जुड़े व्यापक सवाल के रूप में देखा है।MCD की 17 दिनों की कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि सत्य निकेतन हादसे के बाद राजधानी में अनधिकृत निर्माण और नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों के खिलाफ अभियान काफी तेज हुआ है। अब अदालत के सामने मुख्य सवाल यह भी है कि PG भवनों की निगरानी और निर्माण नियमों के पालन को लेकर आगे किस तरह की व्यवस्था लागू की जाती है और जिन मामलों में नियमों की अनदेखी हुई है, उनमें जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।