नई दिल्ली। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के मामले में गिरफ्तार हरि राम गुप्ता की नियमित जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। गुप्ता ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए अदालत से जमानत देने की मांग की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसपीएस लालर ने बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें सुनने के साथ जेल प्रशासन की ओर से दाखिल मेडिकल रिपोर्ट पर भी विचार किया। अदालत की ओर से जमानत याचिका पर फैसला जल्द सुनाए जाने की उम्मीद है।
यह मामला दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को पांच मंजिला इमारत गिरने से जुड़ा है। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने इमारत से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच शुरू की और हरि राम गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया। वह इमारत की मालिक उर्मिला गुप्ता के पति हैं।
बुधवार की सुनवाई के दौरान हरि राम गुप्ता की ओर से उनके वकील ने उनकी बढ़ती उम्र और मेडिकल स्थिति को जमानत का प्रमुख आधार बताया। बचाव पक्ष के मुताबिक गुप्ता करीब 82 वर्ष के हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि वह टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं और नियमित दवाओं की जरूरत है। पहले की सुनवाई में भी उनके स्वास्थ्य से जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए थे।
इसी आधार पर पटियाला हाउस कोर्ट ने 28 सितंबर को जेल अधिकारियों को हरि राम गुप्ता की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। मामले को 30 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया गया था। बुधवार को अदालत के सामने मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद न्यायाधीश ने उसका अवलोकन किया और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
हरि राम गुप्ता की इससे पहले दायर जमानत याचिका 18 सितंबर को खारिज हो चुकी है। उस समय अदालत ने कहा था कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। कोर्ट ने हादसे की गंभीरता, सात लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने को देखते हुए उस स्तर पर नियमित जमानत देना उचित नहीं माना था।
पहली जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया था कि इमारत की बिजली के कनेक्शन हरि राम गुप्ता के नाम पर थे। जांच के दौरान दर्ज कुछ गवाहों के बयानों में भी इमारत में चल रहे काम से उनकी कथित भूमिका का उल्लेख किया गया था। हालांकि इन आरोपों और उनकी भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद ही होगा।
बचाव पक्ष ने पहले यह भी कहा था कि हरि राम गुप्ता भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट हैं और उन्होंने 1981 में सेवा छोड़ी थी। उनकी ओर से यह तर्क भी दिया गया कि उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। स्वास्थ्य से संबंधित दलीलों में टाइप-2 डायबिटीज के अलावा एक त्वचा संबंधी बीमारी और नियमित दवा की जरूरत का भी उल्लेख किया गया था।
दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता और चल रही जांच का हवाला दिया। अभियोजन के मुताबिक इमारत के इस्तेमाल, उसमें चल रहे काम और उससे जुड़े परिवार के सदस्यों की भूमिका की जांच अभी जारी है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले आरोपी को जमानत देने पर आपत्ति जताई गई।
18 सितंबर को जमानत खारिज करते समय अदालत ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया था कि हरि राम गुप्ता को डॉक्टरों द्वारा बताई गई सभी जरूरी दवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उस समय कोर्ट ने माना था कि उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी दलीलों पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर उस चरण में नियमित जमानत देने का आधार नहीं बनता।
अब नई जमानत याचिका में मेडिकल आधार को प्रमुखता से उठाया गया है। जेल प्रशासन से मांगी गई मेडिकल रिपोर्ट इसी वजह से इस सुनवाई का अहम हिस्सा रही। अदालत अब यह तय करेगी कि आरोपी की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, उम्र और मामले की जांच की स्थिति को देखते हुए उन्हें नियमित जमानत दी जा सकती है या नहीं।
सत्य निकेतन की इमारत गिरने की घटना के बाद भवन सुरक्षा और निर्माण कार्यों को लेकर भी सवाल उठे थे। पुलिस जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के समय इमारत में किस तरह का काम चल रहा था और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जांच एजेंसी संबंधित लोगों के बयानों और दस्तावेजों के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया में है।
हरि राम गुप्ता की ओर से पहले यह पक्ष रखा गया था कि उन्हें इमारत और वहां चल रहे काम से सीधे तौर पर जोड़ना उचित नहीं है। हालांकि अदालत ने पिछली सुनवाई में कहा था कि जांच में सामने आई सामग्री और गवाहों के बयान ऐसे हैं जिनकी विस्तृत जांच जरूरी है।
इस मामले में सात लोगों की जान जाने के कारण अदालत पहले भी घटना की गंभीरता का उल्लेख कर चुकी है। इसी वजह से जमानत पर फैसला करते समय आरोपी की व्यक्तिगत परिस्थितियों के साथ हादसे की प्रकृति और जांच की मौजूदा स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल पटियाला हाउस कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और जेल की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद आदेश सुरक्षित रखा है। अब अदालत के फैसले से तय होगा कि 82 वर्षीय हरि राम गुप्ता को स्वास्थ्य और उम्र के आधार पर जमानत मिलेगी या उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।
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