नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि संसद की कार्यवाही का एजेंडा और चर्चा का समय तय करने वाले अमित शाह कौन होते हैं। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में पवन खेड़ा ने अमित शाह के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें गृह मंत्री ने विपक्ष से छात्रों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होने को कहा था। खेड़ा ने कहा कि अमित शाह को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि संसद में किस मुद्दे पर और कब चर्चा होगी।
पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष पिछले 18 दिनों से छात्रों से जुड़े मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने गृह मंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा, "वे अब मुहूर्त तय करेंगे? क्यों? क्या वे शहंशाह हैं? वे केवल अमित शाह हैं, शहंशाह नहीं हैं।" कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि आखिर अमित शाह कौन होते हैं संसद का एजेंडा तय करने या चर्चा का मुहूर्त निकालने वाले। उनके इस बयान के बाद संसद के भीतर और बाहर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा था कि सरकार छात्रों से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार हो जाता है तो वह सदन में हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। शाह ने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और चर्चा होने पर देश की जनता के सामने "दूध का दूध, पानी का पानी" हो जाएगा।
अमित शाह ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद से वह नियमित रूप से संसद आ रहे हैं और अपने कार्यालय में बैठते हैं, लेकिन विपक्ष दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। उन्होंने विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। गृह मंत्री ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार छात्रों से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। अब विपक्ष को तय करना है कि वह चर्चा करना चाहता है या हंगामा।
शाह ने कहा कि वह सदन में बैठकर सभी पक्षों को सुनेंगे और सभी सवालों का जवाब देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है। उनके मुताबिक, चर्चा के दौरान वह इस सवाल का भी जवाब देंगे कि विपक्ष ने अब तक चर्चा की मांग क्यों नहीं की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार बताया।
इसी बीच अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा। इसमें उन्होंने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए विपक्ष से बातचीत करने का आग्रह किया। गृह मंत्री ने कहा कि वह चर्चा के दौरान उठाए जाने वाले सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकार की ओर से बातचीत और चर्चा की पेशकश के बावजूद विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया और सरकार पर मुद्दे को टालने का आरोप लगाया।
विपक्ष का कहना है कि उसे गृह मंत्री का भाषण या लेक्चर सुनने में दिलचस्पी नहीं है। विपक्ष की मांग है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि दिल्ली में छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग का आदेश किसने दिया था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को केवल यह जानना है कि छात्रों पर कथित गोलीबारी या कार्रवाई का आदेश किसने दिया।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि आदेश अमित शाह ने दिया था तो उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और यदि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी तो यह उनकी प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने दोनों परिस्थितियों में गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अपना पक्ष रखा गया है और चर्चा के लिए विपक्ष को सदन में आने का आग्रह किया गया है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश इस समय भाषण सुनने के मूड में नहीं है। यादव ने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा के लिए समय सीमा तय करके जवाबदेही से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि संसद में जवाब देना किसी तय समय की शर्त पर नहीं बल्कि जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व के आधार पर होना चाहिए।
संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार बना हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगा रहे हैं। सरकार का कहना है कि वह चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार वास्तविक सवालों से बच रही है। अब देखना होगा कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या संसद की कार्यवाही पर जारी गतिरोध आगे भी जारी रहता है।
Tags: