नई दिल्ली। देश में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 की 'अनुसूची M' (Schedule M) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य दवा निर्माण इकाइयों के अत्यधिक स्वच्छ माने जाने वाले 'ग्रेड A' क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवी संदूषण की निगरानी संबंधी आवश्यकताओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाना है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से देश में दवा निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।स्वास्थ्य मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को इस संबंध में मसौदा अधिसूचना जारी की है। प्रस्ताव के तहत दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले स्वच्छ क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी की स्वीकार्य सीमाओं को संशोधित किया जाएगा। विशेष रूप से इंजेक्शन और अन्य जीवाणुरहित दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले ग्रेड A क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान अनुसूची M में निर्धारित सूक्ष्मजीवी संदूषण की सीमाओं और WHO के तकनीकी दिशानिर्देशों के बीच कुछ अंतर मौजूद हैं। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य इन्हीं अंतरों को दूर करना है, ताकि भारतीय दवा निर्माण नियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानकों के अनुरूप हो सकें।
अनुसूची M भारत में दवा निर्माण के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) यानी अच्छी विनिर्माण पद्धतियों से संबंधित महत्वपूर्ण नियमों का हिस्सा है। इसमें दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए उत्पादन परिसर की स्वच्छता, उपकरणों के रखरखाव, कर्मचारियों के प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्माण प्रक्रियाओं से जुड़ी आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं।दवा निर्माण में स्वच्छता का विशेष महत्व होता है। यदि किसी दवा में निर्माण के दौरान हानिकारक सूक्ष्मजीव प्रवेश कर जाएं, तो इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इंजेक्शन और आंखों में इस्तेमाल होने वाली जीवाणुरहित दवाओं के मामले में यह जोखिम विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।इसी कारण ऐसी दवाओं का निर्माण नियंत्रित वातावरण में किया जाता है। इन क्षेत्रों को स्वच्छता के स्तर के अनुसार ग्रेड A, B, C और D श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। ग्रेड A सबसे संवेदनशील और उच्च स्वच्छता आवश्यकताओं वाला क्षेत्र माना जाता है। यहां दवा की भराई और अन्य महत्वपूर्ण उत्पादन गतिविधियां की जा सकती हैं।प्रस्तावित नियमों के अनुसार, ग्रेड A क्षेत्र में सूक्ष्मजीवी निगरानी के दौरान किसी भी प्रकार की माइक्रोबियल वृद्धि नहीं होनी चाहिए। मसौदे की तालिका में ग्रेड A के लिए हवा के नमूनों, सेटल प्लेट, कॉन्टैक्ट प्लेट और दस्ताने की जांच के संबंध में 'नो ग्रोथ' का मानक प्रस्तावित है। अन्य श्रेणियों के लिए अलग-अलग स्वीकार्य सीमाएं निर्धारित की गई हैं।
इस प्रकार की जांच में वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से यह पता लगाया जाता है कि निर्माण क्षेत्र की हवा, सतहों और कर्मचारियों के दस्तानों पर सूक्ष्मजीवों की कितनी मात्रा मौजूद है। जांच के परिणामों के आधार पर दवा कंपनियां अपने उत्पादन क्षेत्रों की स्वच्छता की स्थिति का आकलन कर सकती हैं।प्रस्तावित बदलाव WHO की तकनीकी रिपोर्ट श्रृंखला TRS 1044 के संबंधित दिशानिर्देशों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इन दिशानिर्देशों में जीवाणुरहित दवाओं के निर्माण के दौरान संदूषण रोकने और नियंत्रित वातावरण की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है।इससे पहले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से संबंधित औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) ने भी इस विषय पर विचार किया था। फरवरी 2026 में हुई बोर्ड की बैठक में ग्रेड A क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवी संदूषण की सीमाओं को WHO मानकों के अनुरूप संशोधित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी।सरकार के इस कदम को भारतीय दवा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत दुनिया के प्रमुख दवा उत्पादक देशों में शामिल है और यहां निर्मित दवाएं अनेक देशों को निर्यात की जाती हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के साथ तालमेल दवा कंपनियों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, प्रस्तावित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दवा निर्माण इकाइयों को अपने मौजूदा निगरानी तंत्र की समीक्षा करनी पड़ सकती है। कंपनियों को यह देखना होगा कि उनके स्वच्छ क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली जांच प्रक्रियाएं, नमूना संग्रह व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली संशोधित आवश्यकताओं के अनुकूल हैं या नहीं।नई व्यवस्था लागू होने पर गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े कर्मचारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। उन्हें निगरानी के परिणामों का नियमित विश्लेषण करना होगा और किसी असामान्य परिणाम की स्थिति में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार आवश्यक कदम उठाने होंगे।स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह अभी प्रस्तावित संशोधन है। मसौदा अधिसूचना के प्रकाशन के बाद संबंधित पक्षों और आम लोगों से आपत्तियां तथा सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। अधिसूचना सार्वजनिक किए जाने की तारीख से 30 दिन की अवधि पूरी होने के बाद मसौदे पर आगे विचार किया जाएगा।दवा निर्माता कंपनियां, उद्योग संगठन, गुणवत्ता नियंत्रण विशेषज्ञ और अन्य संबंधित पक्ष इस प्रस्ताव पर अपनी राय सरकार को भेज सकते हैं। सुझाव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के औषधि विभाग को लिखित रूप में या निर्धारित ईमेल पते पर भेजे जा सकते हैं।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य दवाओं की निर्माण प्रक्रिया में सूक्ष्मजीवी संदूषण की निगरानी को अधिक स्पष्ट और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावी निगरानी से संदूषण संबंधी जोखिमों की समय रहते पहचान करने में सहायता मिल सकती है।फिलहाल स्वास्थ्य मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से मिलने वाले सुझावों की समीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। अंतिम अधिसूचना जारी होने पर ही संशोधित प्रावधान लागू होंगे।सरकार की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि भारतीय दवा निर्माण उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। साथ ही मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों को भी समर्थन मिलेगा।
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