नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायुसेना की पूर्व शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर प्रियंका सक्सेना को दोबारा सेवा में लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी। प्रियंका सक्सेना ने वर्ष 2013 में वायुसेना की नौकरी छोड़ दी थी। बाद में 2021 में MiG-21 लड़ाकू विमान दुर्घटना में उनके पति की मौत हो गई थी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने प्रियंका सक्सेना की अपील को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को उनके मामले पर विशेष रूप से विचार करने का निर्देश दिया। प्रियंका ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली के 2024 के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
मामले की परिस्थितियों को असाधारण मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रियंका सक्सेना को दी जा रही राहत को भविष्य के अन्य मामलों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि इसे एक अलग और विशेष मामला मानते हुए ही कार्रवाई की जाए।प्रियंका सक्सेना भारतीय वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने 2013 में सेवा छोड़ दी थी। इसके बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया, जब 2021 में उनके पति की MiG-21 फाइटर जेट दुर्घटना में मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने दोबारा भारतीय वायुसेना में सेवा का अवसर दिए जाने की मांग उठाई।
मामला आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल तक पहुंचा था। वहां से अपेक्षित राहत नहीं मिलने के बाद प्रियंका सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सर्वोच्च अदालत ने मामले की परिस्थितियों और उनके व्यक्तिगत हालात पर विचार किया।सुप्रीम कोर्ट के सामने महत्वपूर्ण सवाल यह था कि वर्षों पहले स्वेच्छा से सेवा छोड़ चुकी एक शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी को असाधारण परिस्थितियों में दोबारा सेवा में शामिल किए जाने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। सामान्य सेवा नियमों के तहत इस तरह की दोबारा नियुक्ति आसान नहीं होती, लेकिन अदालत ने प्रियंका के मामले को सामान्य मामलों से अलग माना।
पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा लिया। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को उसके सामने लंबित किसी मामले में ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या निर्देश जारी करने की विशेष शक्ति देता है। इसी संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने प्रियंका सक्सेना को राहत प्रदान की।हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी सुनिश्चित किया कि इस फैसले का इस्तेमाल भविष्य में समान प्रकृति के सभी मामलों में स्वतः अधिकार के रूप में न किया जाए। अदालत ने साफ किया कि सरकार प्रियंका सक्सेना के मामले को एक अकेले और विशेष मामले के रूप में देखे।
इस निर्देश का अर्थ है कि फैसला अन्य पूर्व शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के लिए अपने आप सामान्य नियम नहीं बनेगा। कोर्ट ने प्रियंका की परिस्थितियों को बेहद अलग और असाधारण मानते हुए उन्हें विशेष राहत दी है।प्रियंका के मामले में उनके पति की 2021 में MiG-21 दुर्घटना में हुई मौत महत्वपूर्ण परिस्थिति के रूप में सामने आई। पति की मृत्यु के बाद उनकी पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों में बदलाव आया और उन्होंने फिर से वायुसेना में सेवा करने की इच्छा जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए मानवीय परिस्थितियों के साथ सेवा से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि प्रियंका को फिर से सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया इस तरह पूरी की जाए कि इसे भविष्य के मामलों के लिए बाध्यकारी मिसाल न माना जाए।शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सशस्त्र बलों में अधिकारियों को सीमित अवधि के लिए सेवा का अवसर मिलता है। निर्धारित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर उनका कार्यकाल आगे बढ़ सकता है या सेवा समाप्त हो सकती है। प्रियंका भी इसी व्यवस्था के तहत भारतीय वायुसेना में अधिकारी रही थीं।
उनके मामले की खास बात यह है कि उन्होंने 2013 में सेवा छोड़ दी थी और लगभग आठ साल बाद 2021 में पति की मौत के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। इसके बाद दोबारा वायुसेना में शामिल होने की उनकी कोशिश कानूनी प्रक्रिया तक पहुंची।आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने 2024 में मामले पर आदेश दिया था। इस आदेश से राहत नहीं मिलने के बाद प्रियंका ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सर्वोच्च अदालत में उनकी ओर से उनकी विशेष परिस्थितियों को सामने रखा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सामान्य नियमों से अलग राहत देने के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामलों में विशेष आदेश जारी करने की अनुमति देता है, जहां अदालत को लगता है कि पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए असाधारण हस्तक्षेप जरूरी है।कोर्ट का यह निर्देश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें राहत देने के साथ उसकी सीमा भी स्पष्ट कर दी गई है। अदालत ने सरकार से कहा कि इस आदेश को किसी अन्य मामले में सामान्य उदाहरण या पूर्व निर्णय के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाए।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने एक ओर प्रियंका सक्सेना की व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोबारा सेवा का अवसर दिया, वहीं दूसरी ओर यह भी सुनिश्चित किया कि फैसला सशस्त्र बलों की सेवा और पुनर्नियुक्ति से जुड़े सामान्य नियमों को व्यापक रूप से प्रभावित न करे।अदालत के आदेश के बाद अब केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को प्रियंका सक्सेना को भारतीय वायुसेना में दोबारा शामिल करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। उनकी नियुक्ति और सेवा से संबंधित औपचारिकताएं लागू नियमों तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार पूरी की जाएंगी।
यह मामला संविधान के अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल का भी उदाहरण है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट किसी विशिष्ट मामले की परिस्थितियों को देखते हुए पूर्ण न्याय के लिए विशेष आदेश पारित कर सकता है। प्रियंका सक्सेना के मामले में अदालत ने इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए उनके पक्ष में फैसला दिया।सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही साफ कर दिया कि यह राहत केवल प्रियंका सक्सेना के मामले की विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर दी गई है। इसलिए भविष्य में किसी अन्य पूर्व अधिकारी की पुनर्नियुक्ति के दावे पर इस आदेश का स्वतः लाभ नहीं मिलेगा और ऐसे मामलों पर उनकी अपनी परिस्थितियों तथा लागू सेवा नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा।