नई दिल्ली। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले में मदर डेयरी के अधिकारी संजय शर्मा को बरी कर दिया है। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अधिकारी पर एक दूध वितरक से 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों और जांच प्रक्रिया पर विचार करने के बाद कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप उचित संदेह से परे साबित नहीं किए जा सके। इसके बाद आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
स्पेशल CBI जज विजेता सिंह रावत ने 22 सितंबर को इस मामले में फैसला सुनाया। राउज़ एवेन्यू कोर्ट की उपलब्ध कोर्ट सूची में विजेता सिंह रावत स्पेशल जज, पीसी एक्ट, CBI-17 के रूप में सूचीबद्ध हैं।
मामला वर्ष 2024 का बताया गया है। आरोप था कि मदर डेयरी से जुड़े अधिकारी संजय शर्मा ने एक दूध वितरक से कथित तौर पर 60 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के बाद मामला CBI तक पहुंचा और जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ अपने साक्ष्य पेश किए।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI की जांच प्रक्रिया और एजेंसी की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया का भी परीक्षण किया। अदालत ने मामले में CBI मैनुअल के प्रावधानों के पालन से जुड़े पहलुओं पर गौर किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा।
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामले में आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को आरोप उचित संदेह से परे साबित करना होता है। केवल आरोप या संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में भी रिश्वत की मांग सहित आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित करना जरूरी होता है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष संजय शर्मा के खिलाफ अपना मामला उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया।
इसके साथ ही अदालत ने संजय शर्मा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत दंडनीय अपराध के आरोप से बरी कर दिया। यह धारा लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ या रिश्वत से जुड़े अपराधों से संबंधित है।
मामले में CBI की जांच प्रक्रिया भी अदालत के विचार का अहम हिस्सा रही। CBI मैनुअल जांच अधिकारियों के लिए जांच और सत्यापन से जुड़ी प्रक्रियाओं का ढांचा तय करता है। अदालत के समक्ष यह सवाल भी रहा कि मामले की जांच के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का किस सीमा तक पालन किया गया और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश सामग्री आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त थी या नहीं।
अंततः कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश सामग्री के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराने के लिए आवश्यक कानूनी मानक पूरा नहीं होता। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ मामला उचित संदेह से परे साबित नहीं हुआ है।
इस आधार पर स्पेशल CBI जज विजेता सिंह रावत की अदालत ने संजय शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। फैसले के बाद मदर डेयरी अधिकारी के खिलाफ वर्ष 2024 से चले आ रहे कथित 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में उन्हें राहत मिल गई।