नई दिल्ली। चुनाव आयोग के भीतर चुनावी डेटाबेस और डिजिटल सिस्टम के संचालन को लेकर मतभेदों की मीडिया रिपोर्ट के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने ECINet की कार्यप्रणाली को लेकर अपना पक्ष रखा है। आयोग ने कहा है कि ECINet को विकेंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है और इसके माध्यम से होने वाले वैधानिक कार्य चुनाव कानूनों के तहत अधिकृत फील्ड अधिकारी ही करते हैं।यह प्रतिक्रिया इंडियन एक्सप्रेस की उस जांच रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा चुनावी रोल डेटाबेस के कथित केंद्रीकरण और फील्ड अधिकारियों की डिजिटल पहुंच को लेकर आंतरिक रूप से चिंता जताए जाने की बात कही गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस संबंध में अलग-अलग समय पर लिखित टिप्पणियां दर्ज की थीं।चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा कि ECINet की व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 सहित लागू चुनावी कानूनों तथा आयोग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप संचालित की जाती है।
BLO से CEO तक तय हैं अधिकार
चुनाव आयोग के मुताबिक, ECINet पर कानूनी कार्य करने का अधिकार संबंधित वैधानिक और फील्ड अधिकारियों को दिया गया है। इनमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO), डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO) और चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) शामिल हैं।आयोग का कहना है कि ये अधिकारी अपनी यूनिक आईडी और सुरक्षित लॉग-इन क्रेडेंशियल्स के जरिए प्लेटफॉर्म पर प्रमाणित होते हैं और अपने निर्धारित कानूनी दायित्वों का निर्वहन करते हैं।ECI ने कहा कि ECINet एक विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म है और इसे चुनावी कानूनों तथा आयोग के निर्देशों के अनुरूप डिजाइन किया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में क्या दावा?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों के दौरान IT सिस्टम और मतदाता सूची से जुड़े अधिकारों को लेकर कई बार चिंता जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ राज्यों के ERO ने कथित तौर पर सिस्टम में पूरी पहुंच नहीं होने की समस्या बताई थी।रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में एक बाहरी विशेषज्ञ की मदद से सिस्टम का ऑडिट कराने का प्रस्ताव भी रखा था, ताकि यह प्रमाणित किया जा सके कि मतदाता डेटाबेस में बदलाव करने की डिजिटल क्षमता केवल संबंधित वैधानिक अधिकारियों के पास ही है। जुलाई में चुनाव आयुक्त संधू ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।ये विवरण इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और उसमें उद्धृत आंतरिक टिप्पणियों पर आधारित हैं। चुनाव आयोग ने अपने जवाब में ECINet को कानून के अनुरूप विकेंद्रीकृत व्यवस्था बताया है।
मतदाता सूची में ERO की अहम भूमिका
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और चुनावी नियमों के तहत मतदाता सूची तैयार करने में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO की महत्वपूर्ण वैधानिक भूमिका होती है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने तथा दावों और आपत्तियों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया संबंधित अधिकारियों के माध्यम से संचालित होती है।इसी संदर्भ में ECINet की तकनीकी संरचना महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि अब मतदाता सूची से जुड़े कई कार्य डिजिटल सिस्टम के माध्यम से किए जाते हैं।इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की चिंता यह थी कि डिजिटल सिस्टम को संबंधित वैधानिक अधिकारियों की शक्तियों को तकनीकी रूप से सीमित नहीं करना चाहिए।
आयोग ने कहा मतभेद निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा
इससे पहले चुनाव आयोग ने इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि किसी संस्था में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं।आयोग ने कहा कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को सामने रखकर पिछले कई महीनों के दौरान लिए गए व्यापक निर्णयों और मंजूरियों को नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। आयोग के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में मतदाता सूची पुनरीक्षण सहित कई चुनावी सुधारों और करीब 40 नई पहलों पर पूर्ण आयोग ने निर्णय लिए और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए।इस तरह चुनाव आयोग ने आंतरिक टिप्पणियों के अस्तित्व को निर्णय प्रक्रिया के हिस्से के रूप में पेश किया है, जबकि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने उन टिप्पणियों को चुनावी डेटाबेस और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर गंभीर असहमति के रूप में रेखांकित किया है।
Form-6 को लेकर भी सामने आई थी रिपोर्ट
इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में Special Intensive Revision (SIR) से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा को लेकर भी चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने आपत्ति दर्ज की थी।रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने उस बदलाव की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। यह भी दावा किया गया कि आवेदन करने वाले व्यक्ति को पोर्टल पर आगे बढ़ने के लिए उस हिस्से का जवाब देना पड़ रहा था।चुनाव आयोग का व्यापक पक्ष यह रहा है कि अंतिम नीतिगत फैसले पूर्ण आयोग द्वारा लिए जाते हैं और आंतरिक टिप्पणियां अंतिम निर्णय से पहले होने वाले विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।
ECINet में कई डिजिटल सेवाएं एक साथ
ECINet को चुनाव आयोग की विभिन्न डिजिटल सेवाओं और एप्लिकेशन को एक प्लेटफॉर्म पर लाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। चुनाव आयोग ने जनवरी 2026 में इसे लॉन्च करते समय पारदर्शिता, विश्वसनीयता और मतदाताओं के लिए सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म में आयोग के 40 से अधिक ऐप और पोर्टल को एकीकृत करने की योजना थी।इस प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाता पंजीकरण से लेकर चुनाव प्रबंधन से जुड़े विभिन्न डिजिटल कार्यों को एकीकृत करने की कोशिश की गई है।
कानूनी अधिकार और तकनीकी पहुंच पर केंद्रित बहस
मौजूदा विवाद का प्रमुख सवाल यह है कि कानून द्वारा फील्ड अधिकारियों को दिए गए अधिकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी वास्तविक तकनीकी पहुंच किस तरह एक-दूसरे के अनुरूप रहती है।इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आंतरिक नोट्स के आधार पर दावा किया गया है कि कुछ चुनाव आयुक्तों ने इस संबंध में चिंताएं उठाई थीं। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ECINet की संरचना विकेंद्रीकृत है और वैधानिक कार्य केवल अधिकृत अधिकारियों द्वारा उनकी यूनिक आईडी और सुरक्षित क्रेडेंशियल्स के जरिए किए जाते हैं।इस मामले में फिलहाल दो पक्ष सामने हैं—मीडिया रिपोर्ट में उद्धृत आंतरिक टिप्पणियां, जिनमें डिजिटल नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए गए हैं, और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष, जिसमें प्लेटफॉर्म को कानून के अनुरूप तथा विकेंद्रीकृत बताया गया है। आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और आंतरिक विचार-विमर्श को अंतिम निर्णय से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
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