नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने महत्वपूर्ण पहल की है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत हितधारकों के साथ नौवीं और दसवीं बैठक आयोजित की गई। इन बैठकों में राजधानी में प्रस्तावित एजुकेशन और मेडिकल हब के विकास को लेकर विशेष चर्चा हुई। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू की देखरेख में हुई बैठकों में नरेला को शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार किया गया। प्रस्ताव के तहत नरेला में 138 हेक्टेयर क्षेत्र में एजुकेशन हब विकसित करने की योजना है, जहां विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों और स्टार्टअप से जुड़ी गतिविधियों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
दिल्ली विकास प्राधिकरण की ओर से तैयार मास्टर प्लान 2047 का उद्देश्य राजधानी में अगले कई वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा देना है। इसमें आवास, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में दिल्ली मास्टर प्लान 2047 का अनावरण किया था। इसके तहत राजधानी के भविष्य के विकास को व्यवस्थित रूप देने की योजना तैयार की गई है।
बुधवार को आयोजित बैठकों में विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रस्तावित एजुकेशन हब में उच्च शिक्षा और कौशल विकास से संबंधित संस्थानों को एक ही क्षेत्र में स्थापित करने की योजना है। इससे विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया है।
नरेला में प्रस्तावित 138 हेक्टेयर के एजुकेशन हब में विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों और स्टार्टअप गतिविधियों के लिए स्थान निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इस योजना का उद्देश्य केवल शैक्षणिक संस्थानों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियों को एक साथ विकसित करना भी है।
इस प्रस्ताव के माध्यम से नरेला को दिल्ली के महत्वपूर्ण शैक्षणिक क्षेत्रों में शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यहां उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ शोधकर्ताओं और व्यावसायिक प्रशिक्षण हासिल करने वाले युवाओं के लिए सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
बैठकों में स्कूलों के विकास से संबंधित नियमों पर भी चर्चा हुई। मास्टर प्लान में सामान्य स्कूलों, आवासीय विद्यालयों और विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए बनाए जाने वाले शैक्षणिक संस्थानों को अधिक फ्लोर एरिया रेश्यो यानी एफएआर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शामिल है।
एफएआर एक महत्वपूर्ण निर्माण संबंधी मानक है, जो निर्धारित करता है कि किसी भूखंड के आकार के अनुपात में कुल कितना निर्मित क्षेत्र विकसित किया जा सकता है। इस अनुपात में वृद्धि से निर्धारित जमीन पर अधिक शैक्षणिक सुविधाएं विकसित करने की संभावना बन सकती है। हालांकि, वास्तविक निर्माण की अनुमति संबंधित नियमों और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।
विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए अधिक सुविधाओं का प्रावधान भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रस्ताव का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों और विशेष सहायता की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शैक्षणिक बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहित करना है।
शिक्षा क्षेत्र के अलावा मेडिकल हब के विकास पर भी चर्चा की गई। दिल्ली जैसे बड़े महानगर में स्वास्थ्य सेवाओं का योजनाबद्ध विस्तार महत्वपूर्ण विषय है। प्रस्तावित मेडिकल हब के माध्यम से भविष्य में चिकित्सा संबंधी सुविधाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
मास्टर प्लान 2047 के तहत दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में भूमि उपयोग और विकास से संबंधित व्यवस्थाओं का निर्धारण किया गया है। डीआरए की आधिकारिक योजना में नरेला के विकास, संस्थागत सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक उपयोग के क्षेत्रों से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।
बैठकों का उद्देश्य प्रस्तावित प्रावधानों पर संबंधित हितधारकों से विचार प्राप्त करना और विकास संबंधी आवश्यकताओं पर चर्चा करना है। इस प्रक्रिया के माध्यम से शिक्षा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी जरूरतों को योजना में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
नरेला में एजुकेशन हब का विकास दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। इससे राजधानी के उन हिस्सों में उच्च शिक्षा और कौशल विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराने की संभावना बनेगी, जहां भविष्य में जनसंख्या और शहरी गतिविधियों का विस्तार अपेक्षित है।
हालांकि, प्रस्तावित 138 हेक्टेयर एजुकेशन हब के निर्माण की अंतिम समयसीमा, कुल लागत और संस्थानों के आवंटन से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। इन विषयों पर संबंधित विभागों के आगामी निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।
दिल्ली विकास प्राधिकरण की यह पहल राजधानी को वर्ष 2047 तक आधुनिक और योजनाबद्ध महानगर के रूप में विकसित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जमीन तथा निर्माण मानकों से जुड़े प्रस्तावों पर हुई चर्चा को इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।