Delhi दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब की याचिका पर तीन मांगों के संबंध में नोटिस जारी किए। इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति न दिए जाने को चुनौती दी गई थी। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने विरोध प्रदर्शन के अनुरोध को मनमाने ढंग से खारिज किए जाने को चुनौती दी और दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 48 (2022) के तहत लगाई गई पाबंदियों की वैधता पर सवाल उठाए।
उन्होंने तर्क दिया कि अनुरोध को खारिज करने का आदेश बिना किसी ठोस कारण के दिया गया था और उचित कानूनी आधार के बिना मौलिक अधिकारों को सीमित करने के लिए स्टैंडिंग ऑर्डर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। याचिका में स्टैंडिंग ऑर्डर को लागू करने के तरीके पर खास संवैधानिक सवाल उठाए गए हैं। इनमें शांतिपूर्ण सभाओं को रोकने के आधार के तौर पर प्रशासनिक दिशानिर्देशों का इस्तेमाल और प्रस्तावित प्रदर्शन का अलग-अलग आकलन न करना शामिल है।
इंडियन यूथ कांग्रेस ने 25 सितंबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए आवेदन किया था। संगठन ने सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी कानूनी शर्तों का पालन करने का भरोसा दिया था। बार-बार फॉलो-अप करने के बावजूद, आवेदन खारिज करने की जानकारी 1 अक्टूबर को दी गई, जो प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित पहली तारीख थी। याचिका में सामान्य कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक से जुड़ी चिंताओं का बिना ठीक से कारण बताए यांत्रिक तरीके से हवाला देने को चुनौती दी गई है। इसमें यह भी सवाल उठाया गया है कि 10 दिन पहले आवेदन करने की शर्त को एक सख्त नियम क्यों माना जाता है, जबकि उचित परिस्थितियों में कम समय के नोटिस पर दिए गए आवेदनों पर विचार करने का प्रावधान है।
आज की सुनवाई के दौरान, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने नोटिस जारी करने का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि जंतर-मंतर को तय विरोध स्थल की सूची से हटाने (डी-नोटिफिकेशन) के बाद यह याचिका बेअसर हो गई है। इंडियन यूथ कांग्रेस ने इस तर्क का विरोध किया। इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि उठाए गए मुद्दों की न्यायिक जांच जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि बाद में हुए डी-नोटिफिकेशन को ध्यान में रखते हुए याचिका की मांगों में बदलाव किया जाएगा।