नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला हॉस्टल गिरने से सात लोगों की मौत के बाद सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में पांच छात्रों सहित सात लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। अब दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उसने करीब तीन महीने पहले ही इलाके की इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था और आग लगने के संभावित खतरों को लेकर चिंता जताई थी। पुलिस ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को पत्र भेजकर सत्य निकेतन में जल्द कार्रवाई करने की सलाह भी दी थी, लेकिन कथित रूप से उस चेतावनी पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया।

पिछले रविवार को सत्य निकेतन क्षेत्र में स्थित एक बहुमंजिला हॉस्टल अचानक गिर गया था। इस दुर्घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हॉस्टल में बड़ी संख्या में छात्र रहते थे। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया गया, लेकिन पांच छात्रों सहित सात लोगों को बचाया नहीं जा सका।

हादसे के बाद भवन की सुरक्षा, निर्माण की गुणवत्ता और संबंधित विभागों की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे। इसी बीच पुलिस की ओर से पहले भेजी गई एक चिट्ठी की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि साउथ कैंपस थाने के प्रभारी ने 17 जून को महरौली के उपजिलाधिकारी को पत्र लिखा था। पत्र में सत्य निकेतन क्षेत्र में जन सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख करते हुए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई थी।

पुलिस की यह चेतावनी हौज रानी इलाके में एक ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ प्रतिष्ठान में लगी भीषण आग के बाद की गई जांच के दौरान सामने आई जानकारी पर आधारित थी। उस अग्निकांड में 23 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद विभिन्न इलाकों में चल रहे हॉस्टल, गेस्ट हाउस और इसी तरह की व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल की गई। इसी प्रक्रिया में सत्य निकेतन की कई इमारतों को लेकर भी चिंताएं सामने आई थीं।

हौज रानी अग्निकांड के लगभग दो सप्ताह बाद साउथ कैंपस थाने के एसएचओ ने महरौली के एसडीएम को पत्र भेजा। इसमें सत्य निकेतन क्षेत्र की इमारतों की स्थिति, आग से बचाव के उपायों और बड़ी संख्या में छात्रों के रहने से जुड़े खतरे का जिक्र किया गया था। पुलिस ने इलाके में जल्द निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई की सलाह दी थी। अब हॉस्टल गिरने की घटना के बाद वही पत्र प्रशासनिक सतर्कता की कमी की ओर इशारा कर रहा है।

सत्य निकेतन दक्षिण दिल्ली का प्रमुख छात्र बहुल इलाका है। इसके आसपास करीब 13 कॉलेज स्थित हैं। विभिन्न राज्यों और शहरों से आने वाले बड़ी संख्या में छात्र यहां किराए के कमरों, पीजी और निजी हॉस्टलों में रहते हैं। छात्रों की अधिक संख्या के कारण इलाके में आवासीय भवनों को हॉस्टल या पेइंग गेस्ट सुविधा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कई इमारतों में उपलब्ध स्थान की तुलना में ज्यादा लोगों के रहने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।

छात्रों की बढ़ती संख्या के कारण सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारतों और हॉस्टलों की मांग काफी अधिक है। ऐसी स्थिति में भवनों की संरचनात्मक मजबूती, स्वीकृत नक्शा, निकासी मार्ग, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन सीढ़ियों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक हो जाती है। एक ही इमारत में बड़ी संख्या में लोगों के रहने पर मामूली लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

पुलिस के पत्र के बाद संबंधित प्रशासनिक विभागों ने क्या कार्रवाई की, अब इसकी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि पत्र मिलने के बाद इलाके की इमारतों का निरीक्षण कराया गया था या नहीं। यदि निरीक्षण किया गया था तो कितनी इमारतों में नियमों का उल्लंघन मिला और उनके खिलाफ क्या कदम उठाए गए। सत्य निकेतन में गिरी इमारत का नाम भी किसी जांच या कार्रवाई की सूची में शामिल था या नहीं, यह महत्वपूर्ण सवाल है।

हादसे के बाद पीड़ित छात्रों के परिजन जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि पुलिस की चेतावनी पर समय रहते गंभीरता से कार्रवाई की जाती तो संभवतः इस दुर्घटना को रोका जा सकता था। मृतकों के परिवारों के लिए यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी की विफलता का मामला भी बन गया है।

अब पुलिस द्वारा भेजे गए पत्र, प्रशासन की प्रतिक्रिया और हादसे वाली इमारत से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। भवन का निर्माण स्वीकृत योजना के अनुसार हुआ था या नहीं, उसमें बाद में कोई अवैध बदलाव किया गया था या नहीं और उसे हॉस्टल के रूप में संचालित करने की अनुमति थी या नहीं, जैसे सवालों के जवाब जांच में तलाशे जाएंगे। इमारत के मालिक और संचालक की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

इस मामले ने दिल्ली के छात्र बहुल इलाकों में संचालित पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा का व्यापक मुद्दा भी सामने ला दिया है। सिर्फ सत्य निकेतन ही नहीं बल्कि मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, कालू सराय और अन्य इलाकों में भी बड़ी संख्या में छात्र छोटे कमरों और बहुमंजिला भवनों में रहते हैं। इन इमारतों में आग से बचाव, आपातकालीन निकासी और संरचनात्मक सुरक्षा की नियमित जांच आवश्यक है।

सत्य निकेतन की दुर्घटना में सात लोगों की मौत ने एक बार फिर चेताया है कि सरकारी विभागों के बीच केवल पत्राचार पर्याप्त नहीं है। किसी विभाग की ओर से खतरे की जानकारी दिए जाने के बाद समयबद्ध निरीक्षण और कार्रवाई भी जरूरी है। अब जांच से ही स्पष्ट होगा कि पुलिस की चेतावनी पर कितना काम हुआ और किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ छात्र बहुल क्षेत्रों की सभी इमारतों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराना भी आवश्यक माना जा रहा है।

Tags: