सिख विरोधी दंगों पर कांग्रेस की जवाबदेही तय करने की मांग, सिरसा का बड़ा बयान
नई दिल्ली। दिल्ली में INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों की बात करने से पहले कांग्रेस को 1984 के सिख विरोधी दंगों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने रैली के समय और उसके राजनीतिक उद्देश्य पर भी सवाल उठाए।सिरसा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा की बात कर रही है, लेकिन उसे अपने राजनीतिक इतिहास से जुड़े गंभीर सवालों का भी सामना करना चाहिए। उनके अनुसार, 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए लोगों और प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस मुद्दे पर जवाबदेही तय करने की मांग की।यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता, कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों को लेकर रैली आयोजित की। इस कार्यक्रम में विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया और केंद्र सरकार तथा चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाए।
1 नवंबर की तारीख को लेकर सिरसा ने उठाए सवाल
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 1 नवंबर 1984 का दिन सिख समुदाय के इतिहास में बेहद दर्दनाक अध्याय के रूप में दर्ज है। इस दिन दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया था। हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा।सिरसा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को इस त्रासदी के लिए अपनी राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दंगों के पीड़ित परिवार आज भी न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। ऐसे में उसी तारीख को राजनीतिक रैली आयोजित करना पीड़ितों की भावनाओं को आहत करने वाला है।उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस विवादित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। सिरसा ने इस बयान को 1984 की हिंसा के संदर्भ में कांग्रेस की जवाबदेही से जोड़ते हुए सवाल उठाए।सिरसा ने कहा कि कांग्रेस को पहले यह बताना चाहिए कि उस समय हिंसा को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी ने क्या प्रयास किए।
हरि नगर से तिलक नगर तक भाजपा ने निकाली पदयात्रा
INDIA गठबंधन की रैली के समानांतर भाजपा ने पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर से तिलक नगर तक विरोध पदयात्रा निकाली। इसमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका सहित कई नेता शामिल हुए।भाजपा नेताओं ने 1984 की हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय और कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी की मांग की। प्रदर्शन में सिख समुदाय के कई लोगों और पीड़ित परिवारों ने भी हिस्सा लिया।केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1984 की हिंसा को सुनियोजित नरसंहार बताया। उन्होंने कहा कि इसे केवल स्वत:स्फूर्त जनाक्रोश के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर पीड़ितों के साथ न्याय नहीं करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर भी उठाए सवाल
सिरसा ने 1984 के दंगों के दौरान कांग्रेस के कुछ नेताओं की कथित भूमिका का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और अन्य नेताओं का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को लंबे समय तक राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा।उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दंगों के दौरान जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उन्हें न्याय दिलाने के लिए पार्टी ने क्या किया।हालांकि, 1984 के मामलों में अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग न्यायिक कार्यवाही हुई है। इसलिए सभी नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को एक समान न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
INDIA गठबंधन की रैली का क्या था उद्देश्य?
दरअसल, INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित की थी। इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं के शामिल होने का कार्यक्रम था।रैली का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना, चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाना था।विपक्षी दलों ने चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित वोट चोरी के आरोपों की जांच की मांग की। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की तारीख पर सवाल उठाए।
सिरसा ने राजनीतिक जवाबदेही की मांग दोहराई
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन राजनीतिक दलों को ऐतिहासिक घटनाओं और उनसे प्रभावित परिवारों की भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए।उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से 1984 के सिख विरोधी दंगों पर स्पष्ट जवाब देने और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग की।इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। एक तरफ INDIA गठबंधन चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों को लेकर सरकार तथा चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस को घेर रही है।
एक ही दिन दिल्ली में दो राजनीतिक प्रदर्शन
1 नवंबर को दिल्ली में दो अलग-अलग राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन ने सियासी टकराव को और बढ़ा दिया। रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की रैली हुई, जबकि पश्चिमी दिल्ली में भाजपा ने 1984 के पीड़ितों की याद में पदयात्रा निकाली।दोनों आयोजनों के मुद्दे अलग-अलग थे, लेकिन इनके केंद्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप रहे।अब इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल 1984 के पीड़ितों को न्याय, चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक दलों की जवाबदेही का है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से इस मुद्दे पर बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।