Delhi राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में पहुंचने के बाद, दिल्ली यातायात पुलिस ने गुरुवार को संबंधित विभागों, नागरिक एजेंसियों और पड़ोसी राज्यों और जिलों के पुलिस अधिकारियों के प्रतिनिधियों के साथ एक अंतर-राज्य समन्वय बैठक की। बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सीएक्यूएम निर्देशों का प्राथमिकता के आधार पर अनुपालन किया जाना चाहिए और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वास्तविक समय के समन्वय, निर्देशों को साझा करने और विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई की निगरानी के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का निर्णय लिया गया।
इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर में गैर-अनुपालन वाली अंतर-शहर और अंतर-राज्यीय बसों के प्रवेश को रोकने पर विशेष जोर दिया गया। ऐसी बसों को बॉर्डर पर ही डायवर्ट किया जाना चाहिए, क्योंकि दिल्ली में प्रवेश करने के बाद उन्हें डायवर्ट करने से ट्रैफिक जाम होता है और अतिरिक्त प्रदूषण होता है। लागू निर्देशों के अनुसार, केवल ईवी, सीएनजी और बीएस-VI डीजल बसों को निर्धारित शर्तों के अधीन अनुमति है। बैठक में अधिसूचित छूट के अधीन, दिल्ली के बाहर पंजीकृत वाहनों पर लागू प्रवेश प्रतिबंधों की भी समीक्षा की गई। यह निर्णय लिया गया कि दिल्ली की सीमाओं पर प्रमुख डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाने चाहिए जो स्पष्ट रूप से दर्शाते हों कि निर्धारित उत्सर्जन मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले गैर-छूट वाले वाहनों सहित निषिद्ध वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में अलग-अलग अवधि के लिए वाहनों के संचालन की अनुमति के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। इस बात पर जोर दिया गया कि जिन वाहनों को कानूनी रूप से दिल्ली में परिचालन की अनुमति नहीं है, उन्हें लागू प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। संबंधित अधिकारियों से नो-एंट्री समय को सख्ती से लागू करने, गैर-निर्धारित और ओवरलोड वाहनों की जांच करने और निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन में निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी) सामग्री का परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी आग्रह किया गया। वाहन मालिकों को सलाह दी गई कि वे जहां भी लागू हो, वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) सुनिश्चित करें।