Delhi दिल्ली : महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद के बीच, राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को अपनी मातृभाषा पर गर्व करते हुए सभी भाषाओं का सम्मान करने के महत्व पर ज़ोर दिया। वे आज जेएनयू में श्री छत्रपति शिवाजी महाराज विशेष सुरक्षा एवं सामरिक अध्ययन केंद्र और कुसुमाग्रज विशेष मराठी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति केंद्र का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। महाराष्ट्र के भाषा मंत्री उदय सामंत, जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित, तंजौर राजवंश के छत्रपति बाबाजीराजे भोसले और रजिस्ट्रार रविकेश भी उपस्थित थे। फडणवीस ने जेएनयू में छत्रपति शिवाजी महाराज की रणनीतिक दूरदर्शिता और सैन्य रणनीति पर अध्ययन शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, "यूनेस्को ने शिवाजी महाराज के 12 किलों को 'मराठा सैन्य परिदृश्य' के रूप में मान्यता दी है और उन्हें विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है। शिवाजी महाराज ने विदेशी खतरों की पहचान की और सह्याद्री, पश्चिमी घाट और तटीय क्षेत्रों में अभेद्य किले बनवाए, जिससे मराठों को पूरे भारत में अपना परचम लहराने की प्रेरणा मिली। उनकी सैन्य रणनीति की आज भी दुनिया भर में प्रशंसा की जाती है। शिवाजी महाराज का प्रत्येक युद्ध सामरिक कौशल का एक उदाहरण है और उन्हीं के कारण स्वराज्य की स्थापना हुई। मराठा लोगों में अदम्य साहस छत्रपति शिवाजी महाराज ने ही जगाया था।"
मुख्यमंत्री ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "मराठी एक बहुत प्राचीन भाषा है। शिवाजी महाराज की शाही मुहर हमारी नौसेना के ध्वज पर अंकित है और अब मराठी की शाही मुहर दिल्ली में भी स्थापित हो गई है। आज भी मराठी साहित्य और रंगमंच सर्वोच्च स्तर के हैं। जिस भाषा ने रंगमंच को जीवित रखा है, वह मराठी है। सभी विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा पर शोध होना चाहिए।" उन्होंने यह भी घोषणा की कि जेएनयू परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की एक प्रतिमा स्थापित की जाएगी।