नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सांसद को औपचारिक नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। पुलिस ने उनके नई दिल्ली स्थित आवास के बाहर नोटिस चस्पा किया है। मणिपुर के इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद अकोइजम पर जेएनयू की कम से कम 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच के बाद उन्हें प्रोफेसर के पद से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि, सांसद ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन की टीम ने कांग्रेस सांसद को नोटिस जारी किया है। इसमें उन्हें पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने और अपना पक्ष रखने को कहा गया है। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत जारी किया गया है।पुलिस ने सांसद को गुरुवार, 15 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच अधिकारी मामले से संबंधित आरोपों, विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उनसे सवाल पूछ सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने जांच से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की हैं।दरअसल, अंगोमचा बिमोल अकोइजम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के अंतर्गत सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। मई 2026 में कम से कम 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतें दर्ज कराई थीं।
छात्राओं ने अपनी शिकायतों में आरोप लगाया था कि अकोइजम उन्हें बैठक या अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के बहाने विश्वविद्यालय परिसर स्थित अपने आवास पर बुलाते थे। कुछ शिकायतकर्ताओं ने उनके व्यवहार को अनुचित बताया और यौन उत्पीड़न का प्रयास किए जाने के आरोप लगाए।इसके अलावा कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि कक्षाओं के दौरान भी आपत्तिजनक और अनुचित टिप्पणियां की जाती थीं। इन शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच की प्रक्रिया शुरू की थी।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने शिकायतों की जांच की। इस दौरान छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने समिति की जांच के बाद 9 अक्टूबर 2026 को अंगोमचा बिमोल अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।हालांकि, अकोइजम ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करार देते हुए दावा किया कि उन्हें आंतरिक समिति के निष्कर्षों पर जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी आपत्ति जताई।
विश्वविद्यालय की कार्रवाई के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने 11 अक्टूबर को पुलिस को शिकायत भेजी। इसके आधार पर दिल्ली के वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में कांग्रेस सांसद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।पुलिस के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 और 79 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा का अपमान करने के उद्देश्य से शब्दों, संकेतों या अन्य गतिविधियों से संबंधित हैं।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने विश्वविद्यालय से संबंधित दस्तावेज और आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट प्राप्त की। अब इन दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। पुलिस सांसद का पक्ष भी दर्ज करना चाहती है।इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर कांग्रेस सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर अकोइजम को लोकसभा से निलंबित करने का अनुरोध किया। बीजेपी की महिला सांसदों ने जेएनयू की छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए मामले को गंभीर बताया।इसके अलावा बीजेपी महिला मोर्चा ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया था। पार्टी नेताओं ने इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे।दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच और बर्खास्तगी की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
फिलहाल दिल्ली पुलिस की जांच जारी है। नोटिस जारी होने के बाद अब सांसद का बयान दर्ज किया जाना महत्वपूर्ण होगा। पुलिस विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट, छात्राओं की शिकायतों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल करेगीगौरतलब है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होना या पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जाना उसके दोषी साबित होने के समान नहीं है। इस मामले में भी आरोपों की सत्यता और आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।