New Delhi, नई दिल्ली : आप के सौरभ भारद्वाज ने रविवार को एलजी की अधिसूचना की आलोचना की, जिसके कारण दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों ने हड़ताल शुरू कर दी है , जो दूसरे दिन भी जारी है। एएनआई से बात करते हुए भारद्वाज ने दिल्ली के उपराज्यपाल पर "बेतुका तानाशाही फरमान" जारी करने और वकीलों की चिंताओं को दूर करने से इनकार करने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस थानों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पुलिस द्वारा साक्ष्य उपलब्ध कराने की व्यवहार्यता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "पिछले दो दिनों से
दिल्ली
की सभी ज़िला अदालतों में वकीलों की हड़ताल चल रही है । दिल्ली के उपराज्यपाल वकीलों की बात नहीं सुनना चाहते। उन्होंने एक बेतुका तानाशाही आदेश पारित किया है...पुलिस थानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए गवाही कैसे दे सकती है? पुलिस से जिरह संभव नहीं होगी। कल कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन होंगे।"
इस बीच, ऑल डिस्ट्रिक्ट्स बार एसोसिएशन की समन्वय समिति ने सोमवार से चल रही हड़ताल को जारी रखने और तेज करने का संकल्प लिया है। दिल्ली जिला अदालतों के वकील पुलिस थानों में पुलिसकर्मियों की उपस्थिति से संबंधित उपराज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना के विरोध में शुक्रवार से हड़ताल पर हैं।शनिवार को समन्वय समि ति की बैठक हुई। 
बैठक के दौरान, दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) द्वारा जारी 13 अगस्त, 2025 की अधिसूचना के खिलाफ, दिल्ली की सभी जिला अदालतों में सोमवार को पूरी तरह से काम से दूर रहने का निर्णय लिया गया ।समिति ने कहा कि यह अधिसूचना केंद्रीय गृह सचिव द्वारा जारी 15 जुलाई, 2024 के परिपत्र की अवहेलना करते हुए जारी की गई है।वकीलों के संगठन ने कहा कि यह अधिसूचना आम जनता के खिलाफ है और जनता को जागरूक करने के लिए 25.08.2025 को दिल्ली के सभी न्यायालय परिसरों के बाहर प्रदर्शन भी किया जाएगा।
समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि नायब न्यायालयों सहित ईडी और सीबीआई के सरकारी अभियोजकों और अधिकारियों को भी अदालतों में उपस्थित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।यह भी कहा गया है कि यदि सोमवार तक अधिसूचना वापस नहीं ली गई तो वकील एलजी हाउस का घेराव सहित विरोध प्रदर्शन तेज करने के लिए बाध्य होंगे। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने हड़ताल का समर्थन किया।
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