दिल्ली HC ने युवराज सिंह के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की

Update: 2026-08-01 13:19 GMT

New Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) की सुरक्षा के लिए प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला साबित कर दिया है। कोर्ट ने माना कि AI से बने डीपफेक, मनगढ़ंत पोस्ट और उनके नाम, तस्वीर और हुलिए का बिना इजाज़त कमर्शियल इस्तेमाल उनकी मेहनत से बनाई गई प्रतिष्ठा और कमर्शियल वैल्यू को नुकसान पहुंचा रहा है।

कोर्ट ने कहा कि इसमें "कोई शक नहीं" है कि पर्सनैलिटी और प्राइवेसी राइट्स का उल्लंघन करने वालों से "सख्ती से निपटा" जाना चाहिए और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एकतरफा अंतरिम आदेश (ex parte interim injunction) जारी किया।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में सेलिब्रिटी के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा को मज़बूत करने वाले एक अहम आदेश में, दिल्ली हाई कोर्ट ने कई सोशल मीडिया यूज़र्स, अज्ञात "जॉन डो" (John Doe) प्रतिवादियों, ऑनलाइन विक्रेताओं और मध्यस्थों को पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह की पहचान का इस्तेमाल करके उनकी सहमति के बिना AI-जनरेटेड कंटेंट और सामान बनाने, पब्लिश करने या कमर्शियल तौर पर इस्तेमाल करने से रोक दिया है।

जस्टिस ज्योति सिंह ने माना कि युवराज सिंह ने एकतरफा अंतरिम आदेश (ex parte ad interim injunction) पाने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनाया है। कोर्ट ने कहा कि सुविधा का संतुलन उनके पक्ष में है और अगर अंतरिम सुरक्षा नहीं दी गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। कोर्ट ने दोहराया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने हमेशा पर्सनैलिटी राइट्स को मान्यता दी है और उनकी सुरक्षा की है। कोर्ट ने माना कि किसी व्यक्ति को अपने नाम, हुलिए और अपने व्यक्तित्व की अन्य सभी विशेषताओं की सुरक्षा करने का अधिकार है, और कोई भी तीसरा पक्ष बिना सहमति या अधिकार के उन विशेषताओं का इस्तेमाल नहीं कर सकता है।

कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के नाम, तस्वीर या अन्य विशिष्ट विशेषताओं का बिना इजाज़त कमर्शियल इस्तेमाल पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन है, इससे व्यक्ति की अनूठी पहचान कमज़ोर होती है और दूसरों को गैर-कानूनी कमर्शियल लाभ उठाने का मौका मिलता है।

D.M. एंटरटेनमेंट, अनिल कपूर, सुनील गावस्कर और जयकिशन काकुभाई सराफ जैसे पिछले न्यायिक उदाहरणों का ज़िक्र करते हुए, कोर्ट ने माना कि जहां पर्सनैलिटी राइट्स स्थापित होते हैं, वहां व्यक्ति उनके बिना इजाज़त इस्तेमाल के खिलाफ निषेधाज्ञा सुरक्षा (injunctive protection) पाने का हकदार होता है।

कोर्ट ने कहा कि युवराज सिंह भारत के सबसे मशहूर क्रिकेटरों में से एक हैं, जिन्होंने लगभग 17 वर्षों तक देश का प्रतिनिधित्व किया, 2011 के विश्व कप में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई, पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय सम्मान हासिल किए, और 'YouWeCan फाउंडेशन' जैसी समाज-सेवा की पहलों के ज़रिए अच्छी-खासी साख (goodwill) भी बनाई है। उनकी अहमियत को देखते हुए, कोर्ट ने कहा कि उन्हें अपनी पर्सनैलिटी और उससे जुड़ी खूबियों पर स्वाभाविक रूप से मालिकाना हक हासिल है। साथ ही, उन्हें इनका कमर्शियल इस्तेमाल करने का एक्सक्लूसिव अधिकार है और वे किसी तीसरे पक्ष द्वारा इनके अनधिकृत इस्तेमाल को रोक सकते हैं।

आरोपों की जांच करते हुए, कोर्ट ने पाया कि कई प्रतिवादी कथित तौर पर AI-जनरेटेड तस्वीरें, डीपफेक वीडियो और मनगढ़ंत सोशल मीडिया पोस्ट पब्लिश कर रहे थे, जिनमें ऐसी घटनाओं को गलत तरीके से दिखाया गया था जो कभी हुईं ही नहीं।

कुछ कंटेंट में क्रिकेटर को अभद्र या गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया था, जबकि अन्य पोस्ट में उन्हें आक्रामक व्यवहार करते हुए या किसी दूसरे क्रिकेटर के साथ मारपीट करते हुए दिखाया गया था। कोर्ट के अनुसार, इस तरह का कंटेंट युवराज सिंह की उस अपार साख और प्रतिष्ठा को धूमिल करता है जो उन्होंने वर्षों की खेल उपलब्धियों और सामाजिक कार्यों से अर्जित की है, जिससे जनता की नजरों में उनकी छवि खराब होती है।

कोर्ट ने उन आरोपों में भी दम पाया कि कुछ ऑनलाइन विक्रेता बिना अनुमति के युवराज सिंह के नाम, तस्वीर और हुलिए का इस्तेमाल करके टी-शर्ट, पोस्टर, स्टिकर और अन्य सामान बना और बेच रहे थे। कोर्ट ने माना कि ऐसी गतिविधियां गलत तरीके से यह धारणा बनाती हैं कि इन प्रोडक्ट्स को क्रिकेटर का समर्थन प्राप्त है या वे उनसे जुड़े हैं। यह 'पासिंग ऑफ' (गलत तरीके से किसी और की पहचान का इस्तेमाल करना) और उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन है, साथ ही इससे उनकी पर्सनैलिटी की कमर्शियल वैल्यू भी कम होती है।

AI टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि पर्सनैलिटी और प्राइवेसी अधिकारों का उल्लंघन करने वालों से "सख्ती से" निपटा जाना चाहिए।

अगली सुनवाई तक, कोर्ट ने प्रतिवादियों (जिनमें अज्ञात लोग भी शामिल हैं) को युवराज सिंह की सहमति के बिना कमर्शियल या पर्सनल फायदे के लिए उनके नाम, निकनेम "युवी", तस्वीर, आवाज़, शक्ल-सूरत या पर्सनैलिटी से जुड़ी किसी भी चीज़ का इस्तेमाल, नकल, पब्लिश, डिस्प्ले या किसी अन्य तरह से फायदा उठाने से रोक दिया है।

यह रोक खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेनरेटिव AI, मशीन लर्निंग, डीपफेक, AI चैटबॉट, फेस मॉर्फिंग, फेस-स्वैपिंग और ऐसी ही दूसरी टेक्नोलॉजी से बनाए गए कंटेंट पर लागू होती है। प्रतिवादियों को क्रिकेटर की AI-जनरेटेड तस्वीरें, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो या उनमें फेरबदल करके बनाया गया कोई भी कंटेंट बनाने या फैलाने से भी रोक दिया गया है।

हाई कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को पहचाने गए Facebook और Instagram URL को 36 घंटे के अंदर हटाने का निर्देश दिया, जबकि Amazon सेलर सर्विसेज़ और Flipkart इंटरनेट को बताए गए प्रोडक्ट लिस्टिंग को हटाने का निर्देश दिया गया। Turtle Wings और SMEEPS को आदेश मिलने के 24 घंटे के अंदर उल्लंघन करने वाले पहचाने गए URL को हटाने का निर्देश दिया गया।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर भविष्य में युवराज सिंह को उल्लंघन करने वाली कोई और पोस्ट या वीडियो मिलती है, तो वे संबंधित इंटरमीडियरी से संपर्क करने या उचित कानूनी उपाय अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे। मामले को आगे की कार्यवाही के लिए लिस्ट किया गया है।

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