नई दिल्ली :भारतीय नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में नाम शामिल होने के आरोपों से जुड़ी कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका पर राऊज एवेन्यू कोर्ट का फैसला टल गया है। अदालत अब इस मामले में 29 अगस्त को अपना आदेश सुनाएगी। सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
यह पुनरीक्षण याचिका अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने मजिस्ट्रेट अदालत के सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की है। मजिस्ट्रेट अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच कराने की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने राऊज एवेन्यू स्थित सत्र न्यायालय का रुख किया।
वर्ष 1980 की मतदाता सूची को लेकर विवाद
याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, लेकिन उनका नाम कथित रूप से वर्ष 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल था। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से करीब तीन वर्ष पहले उनका नाम मतदाता सूची में किस आधार पर दर्ज किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि भारत में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के लिए भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। ऐसे में यह जांच होनी चाहिए कि वर्ष 1980 में उनका नाम शामिल करने के दौरान निर्वाचन अधिकारियों के सामने कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे और उस समय किस प्रक्रिया का पालन किया गया था।
 वर्ष 1982 में नाम हटाने का भी दावा
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि वर्ष 1982 में सोनिया गांधी का नाम संबंधित मतदाता सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद भारतीय नागरिकता प्राप्त करने पर 1983 में उनका नाम दोबारा सूची में शामिल हुआ। शिकायतकर्ता ने पूछा है कि अगर वर्ष 1980 में नाम नियमानुसार जोड़ा गया था तो उसे 1982 में हटाए जाने का कारण क्या था।
याचिकाकर्ता ने कथित रूप से पुराने मतदाता सूची के विवरण और समाचार रिपोर्टों के आधार पर दस्तावेजों एवं पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। पुनरीक्षण याचिका का उद्देश्य मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा शिकायत खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देना है।
मजिस्ट्रेट अदालत ने खारिज कर दी थी शिकायत
सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग वाली शिकायत खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि शिकायत में धोखाधड़ी या जालसाजी जैसे अपराधों के बुनियादी तत्वों को स्थापित करने के लिए कानूनी रूप से पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिए गए। अदालत के अनुसार आरोप मुख्य रूप से सामान्य दावों, मतदाता सूची की कथित प्रति और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित थे। [लॉबीट](https://lawbeat.in/news-updates/sonia-gandhi-electoral-roll-case-delhi-court-issues-notice-in-revision-petition-1545981)
मजिस्ट्रेट अदालत के इसी निर्णय के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई। सत्र न्यायालय ने दिसंबर 2025 में सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया था। बाद में उन्होंने अपना विस्तृत लिखित जवाब प्रस्तुत किया।
 सोनिया गांधी ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
सोनिया गांधी ने अपने जवाब में याचिका को निराधार, राजनीति से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया है। उनकी ओर से कहा गया कि नागरिकता तथा मतदाता सूची से जुड़े विषयों को करीब चार दशक बाद आपराधिक मामले का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने दलील दी कि नागरिकता से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, जबकि मतदाता सूची से जुड़े विवाद निर्वाचन अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में आते हैं। उनकी ओर से आरोपों को गलत, भ्रामक और प्रमाणहीन बताते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज करने की मांग की गई है।
Tags: