नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच नगर निगम दिल्ली (MCD) की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। मच्छर जनित बीमारियों से निपटने वाले स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली होने की जानकारी सामने आई है। विभाग में 1657 पदों के खाली होने से डेंगू नियंत्रण अभियान की रफ्तार और निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता जताई जा रही है।
मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में मच्छरों के लार्वा की जांच, फॉगिंग, एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव और संवेदनशील इलाकों की निगरानी के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की जरूरत होती है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की कमी से जमीनी स्तर पर अभियान प्रभावित होने की आशंका है।
रिपोर्ट के अनुसार, मलेरिया इंस्पेक्टर और एंटी-मलेरिया स्टाफ के कई पद लंबे समय से खाली हैं। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां होने से निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू नियंत्रण के लिए सिर्फ अभियान चलाना काफी नहीं है, बल्कि नियमित सर्वे और समय पर कार्रवाई जरूरी है।
दिल्ली में डेंगू की रोकथाम को लेकर केंद्र और स्थानीय प्रशासन लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों
ने निगरानी बढ़ाने, अस्पतालों को तैयार रखने और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने पर जोर दिया है।
वहीं, विपक्ष और कई पार्षदों ने कर्मचारियों की कमी को लेकर MCD प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब डेंगू का सीजन चरम पर होता है, तब खाली पदों के कारण फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर दबाव बढ़ जाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजधानी में डेंगू के खतरे से निपटने के लिए MCD किस तरह अपनी व्यवस्था मजबूत करेगी और खाली पदों को कब तक भरेगी। आने वाले दिनों में मच्छर नियंत्रण अभियान की सफलता काफी हद तक इसी पर निर्भर करेगी।
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