नई दिल्ली : 29 अक्टूबर 2026। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ सरकारी अधिकारियों को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़े मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है। इस मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही अदालत में अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है, जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री की टिप्पणी से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। गुरुवार को मामले में सुनवाई निर्धारित थी। अदालत द्वारा आदेश सुरक्षित रखे जाने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इस नवीनतम न्यायिक कार्रवाई की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
सरकारी अधिकारियों पर टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 23 सितंबर 2025 को दिल्ली के कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डे पर आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम से जुड़ा है। उस दिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दिल्ली से उत्तर प्रदेश के बड़ौत तक दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बस सेवा शुरू करने के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी अधिकारियों के कामकाज का उल्लेख करते हुए उनकी तुलना भगवान हनुमान से की थी।शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी अधिकारियों को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।शिकायत में कहा गया है कि मुख्यमंत्री का बयान सार्वजनिक मंच से दिया गया था और वहां अधिकारी, कर्मचारी तथा आम नागरिक भी मौजूद थे।
पूंछ में आग लगने पर याद आती है शक्ति' वाली टिप्पणी
शिकायत के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी अधिकारियों के कामकाज की तुलना भगवान हनुमान की शक्तियों से की थी।उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि दिल्ली सरकार के अधिकारी हनुमान जैसे हैं, जिन्हें अपनी शक्तियां तभी याद आती हैं, जब उनकी पूंछ में आग लगती है।शिकायतकर्ता ने इस तुलना पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक आस्था के प्रति अनुचित बताया।हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि मुख्यमंत्री का पूरा भाषण देखने और सुनने पर उसका आशय अलग सामने आता है।पुलिस के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता, समर्पण और काम करने की क्षमता की सराहना की थी।
राम निवास शर्मा ने अदालत में दी शिकायत
इस मामले में राम निवास शर्मा नामक व्यक्ति ने दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में शिकायत दाखिल की है।शिकायत में मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार की अदालत के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई थी।शिकायतकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के तहत कार्यवाही की मांग करते हुए धारा 175(3) के अंतर्गत पुलिस जांच संबंधी आदेश जारी करने का भी अनुरोध किया।अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले में दिल्ली पुलिस से स्थिति रिपोर्ट तलब की थी।
3 अक्टूबर को अदालत ने मांगी थी पुलिस रिपोर्ट
राउज एवेन्यू अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए कश्मीरी गेट पुलिस थाने के प्रभारी से रिपोर्ट मांगी थी।अदालत ने पुलिस को शिकायत से संबंधित तथ्यों की जांच कर 15 अक्टूबर तक स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।इसके बाद दिल्ली पुलिस ने निर्धारित तारीख पर अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल की।रिपोर्ट में मुख्यमंत्री के भाषण का प्रतिलेख और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता से संबंधित प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया गया।अदालत ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए शिकायतकर्ता को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया।
दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री को दी राहत
15 अक्टूबर को दाखिल स्थिति रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।पुलिस के अनुसार, भाषण की आधिकारिक वीडियो रिकॉर्डिंग दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रचार निदेशालय से प्राप्त की गई थी।रिकॉर्डिंग और पूरे भाषण का अध्ययन करने के बाद पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि मुख्यमंत्री का उद्देश्य भगवान हनुमान का अपमान करना या किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत करना नहीं था।पुलिस ने कहा कि भाषण का समग्र स्वर सरकारी कर्मचारियों की प्रशंसा करने वाला था।रिपोर्ट में शिकायतकर्ता पर भाषण के कुछ हिस्सों को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करने का आरोप भी लगाया गया। हालांकि, यह पुलिस का आकलन है, अदालत का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला
शिकायतकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के अंतर्गत कार्रवाई की मांग की है।यह प्रावधान जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले कृत्यों से संबंधित है।पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस धारा के अंतर्गत अपराध स्थापित होने के लिए आवश्यक कानूनी तत्व उपलब्ध सामग्री में सामने नहीं आए।पुलिस के मुताबिक, मुख्यमंत्री के बयान से धार्मिक अपमान करने का इरादा प्रदर्शित नहीं होता।इस कारण पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने का आधार नहीं पाया।
शिकायतकर्ता ने पुलिस रिपोर्ट पर उठाई आपत्ति
पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने के बाद शिकायतकर्ता के अधिवक्ता संजीत कुमार ने अदालत से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था।अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर निर्धारित की।इस सुनवाई में पुलिस की रिपोर्ट और शिकायतकर्ता की आपत्तियों के आधार पर आगे की न्यायिक कार्रवाई पर विचार किया जाना था।अब इस मामले में मुख्य प्रश्न यह है कि क्या अदालत पुलिस की रिपोर्ट को स्वीकार करेगी या शिकायत पर आगे कार्रवाई का निर्देश देगी।
कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ दायर शिकायत से जुड़ा विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।इसमें एक ओर शिकायतकर्ता ने धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री के बयान को कर्मचारियों के लिए प्रेरक और प्रशंसात्मक बताया है।कानूनी दृष्टि से पुलिस की स्थिति रिपोर्ट और अदालत का आदेश अलग-अलग महत्व रखते हैं। पुलिस की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पक्ष में होने के बावजूद अंतिम निर्णय न्यायालय को ही करना है।यदि अदालत आदेश सुरक्षित रखती है, तो इसका अर्थ यह है कि वह आगे अपना निर्णय सुनाएगी। इसे किसी पक्ष के पक्ष में अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।फिलहाल मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का कोई न्यायिक आदेश पुष्ट नहीं है। इस मामले में अदालत के आगामी निर्णय से स्पष्ट होगा कि शिकायत पर आगे कानूनी कार्यवाही होगी या पुलिस की रिपोर्ट स्वीकार की जाएगी।