नई दिल्ली: कनॉट प्लेस के एक रेस्तरां मालिक ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे इस कमर्शियल हब में अनधिकृत विरोध प्रदर्शनों, धरनों या भीड़ इकट्ठा होने की अनुमति न दें, क्योंकि इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
शुक्रवार को वकील उमंग त्यागी ने एक्टिंग चीफ जस्टिस (ACJ) नितिन वासुदेव साम्ब्रे के सामने यह याचिका रखी। इसे कनॉट प्लेस के एक रेस्तरां के पार्टनर आयुष चोपड़ा ने दायर किया है।
सुनवाई के दौरान, ACJ ने बताया कि गुरुवार को इसी तरह की याचिकाओं पर एक आदेश पारित किया गया था। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले पर अब 27 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ता ने कनॉट प्लेस में अनधिकृत भीड़ को रोकने के निर्देश मांगने के साथ-साथ, 10 अक्टूबर को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों को हुए नुकसान का आकलन करने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों से मुआवजा दिलाने की भी मांग की है।
यह याचिका ऐसे समय में आई है जब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों से 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में इकट्ठा होने की अपील की है।
याचिका के अनुसार, सेंट्रल पार्क को विरोध प्रदर्शन के लिए तय की गई जगह नहीं माना गया है। वहां भीड़ इकट्ठा होने से इस इलाके में कमर्शियल गतिविधियों पर बुरा असर पड़ सकता है, खासकर मौजूदा त्योहारी सीजन के दौरान।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इलाके में विरोध प्रदर्शन तय दिशा-निर्देशों के अनुसार और निर्धारित जगहों पर ही होने चाहिए। उनका कहना है कि अनधिकृत प्रदर्शनों से व्यापारियों और रेस्तरां मालिकों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि 10 अक्टूबर को CJP की भीड़ जुटने के कारण - जबकि उन्हें अनुमति नहीं मिली थी - कनॉट प्लेस में दुकानें बंद करनी पड़ीं और दिल्ली के कई बाजारों में कामकाज ठप हो गया।
व्यापारी संगठनों के अनुमानों का हवाला देते हुए, याचिका में दावा किया गया है कि 10 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में 150 से 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि पूरी दिल्ली में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इन व्यवधानों के कारण उनके रेस्तरां के कारोबार में भारी गिरावट आई है, जिसमें नवरात्रि का समय भी शामिल है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि विरोध करने के अधिकार और व्यापारियों के अपना कारोबार चलाने के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन होना चाहिए, और प्रदर्शन केवल तय की गई जगहों पर ही होने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए, याचिका में कहा गया है कि विरोध करने के अधिकार का इस्तेमाल कहीं भी नहीं किया जा सकता, और असहमति जताने वाले प्रदर्शन केवल तय की गई जगहों पर ही होने चाहिए।
इसमें व्यापारियों को हुए नुकसान का आकलन करने और 10 अक्टूबर के आंदोलन के लिए जिम्मेदार लोगों से मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई है।
याचिका में भारत सरकार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली हाई कोर्ट में सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित CJP प्रदर्शन को लेकर सुनवाई चल रही है।
गुरुवार को, हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इस आश्वासन को दर्ज किया कि 'डिपके' (Dipke) की गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए कानून के तहत हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
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