Delhi दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने मंगलवार को एनडीए गठबंधन पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि आगामी 14 नवंबर, जो कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिवस है, उसी दिन एनडीए सरकार के पतन की शुरुआत हो जाएगी। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रमोद तिवारी ने कहा, “सुबह का सूरज निकलेगा एनडीए राज का और शाम को जब सूरज डूबेगा, तब एनडीए सरकार का भी अस्त हो जाएगा। यह पतन सीधा-सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का होगा।” उन्होंने दावा किया कि बिहार का जनादेश इस बार एनडीए के खिलाफ जाएगा और वहां से उठने वाली राजनीतिक लहर पूरे देश में असर दिखाएगी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि बिहार की जनता अब विकास के खोखले वादों, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी है। उन्होंने कहा, “बिहार वह राज्य है जिसने हमेशा बदलाव की दिशा तय की है। जिस दिन वहां एनडीए की हार होगी, उसी दिन देश के राजनीतिक समीकरण भी बदल जाएंगे। तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व ने बिहार को केवल “राजनीतिक प्रयोगशाला” के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को अब यह समझ लेना चाहिए कि बिहार की जनता अब उनके खोखले नारों में नहीं आने वाली। इस बार जनता विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर मतदान करेगी।”
प्रमोद तिवारी ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) की एकजुटता पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की रणनीति जनता के मुद्दों पर केंद्रित है, जबकि एनडीए केवल सत्ता बचाने में लगी है। उन्होंने कहा कि “बिहार से उठने वाला यह संदेश न केवल दिल्ली तक पहुंचेगा बल्कि पूरे देश की राजनीति को नई दिशा देगा। कांग्रेस नेता के इस बयान को सियासी हलकों में “बड़ी भविष्यवाणी” के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों में गहरी उम्मीदें हैं, क्योंकि यह परिणाम 2029 के आम चुनावों की दिशा तय कर सकता है।
इस बीच भाजपा नेताओं ने प्रमोद तिवारी के बयान को “राजनीतिक भ्रम” बताया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बिहार की जनता एक बार फिर विकास और स्थिरता के पक्ष में वोट करेगी। बिहार में अगले चरण के मतदान से पहले नेताओं के इस तरह के तीखे बयानों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।