देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठनात्मक एकजुटता पर जोर देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को स्पष्ट संदेश दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोमवार को रावत से मुलाकात के बाद कहा कि चुनावी राज्य में पार्टी के अभियान सभी नेताओं को साथ लेकर केवल कांग्रेस के बैनर तले चलाए जाएंगे। उनका कहना है कि पार्टी का पूरा फोकस आगामी विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने पर रहेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हरीश रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी ‘धन्यवाद एवं जन संवाद यात्रा’ को आगे बढ़ाया। पार्टी नेतृत्व पहले ही उनके अलग कार्यक्रम को लेकर आपत्ति जता चुका था। उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी रावत को पत्र लिखकर यात्रा आगे नहीं बढ़ाने को कहा था और चुनाव से पहले पार्टी के एकजुट होकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया था। इसके बावजूद रावत सोमवार को अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यात्रा पर निकले।
केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कहा कि उन्होंने चुनाव वाले राज्य में चल रहे अभियान को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री से चर्चा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में कांग्रेस के सभी अभियान प्रदेश के नेताओं के साथ मिलकर और पार्टी के बैनर तले ही आगे बढ़ाए जाएंगे।
वेणुगोपाल के मुताबिक, इन अभियानों का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के मार्गदर्शन में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सभी गतिविधियों का एकमात्र उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करना है।
हरीश रावत की जन संवाद यात्रा को लेकर पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस के भीतर चर्चा चल रही थी। पार्टी नेतृत्व की चिंता यह थी कि चुनाव से पहले किसी वरिष्ठ नेता की अलग राजनीतिक यात्रा संगठन के आधिकारिक कार्यक्रमों से अलग संदेश दे सकती है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि चुनावी अभियान में सभी वरिष्ठ नेता और प्रदेश संगठन एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ें।
हरीश रावत ने सोमवार को जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी यात्रा जारी रखी। यह यात्रा काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी पहुंचने के लिए निर्धारित थी। रावत इसे जनता से संवाद करने और कांग्रेस को मजबूत करने की पहल बताते रहे हैं।
रावत ने अपनी यात्रा को लेकर सोशल मीडिया के जरिए समर्थकों से जुड़ने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि उत्तराखंड में बदलाव और कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने के लिए आगे बढ़ना है। रावत के समर्थकों का कहना है कि जन संवाद यात्रा का उद्देश्य पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि जनता से संपर्क बढ़ाना और संगठन को मजबूत करना है।
दूसरी तरफ पार्टी नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया है कि विधानसभा चुनाव से पहले व्यक्तिगत या समानांतर राजनीतिक कार्यक्रमों की जगह सामूहिक अभियान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उत्तराखंड में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस संगठन अपनी चुनावी रणनीति को एकजुट तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। प्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका लंबे समय से रही है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उनकी जन संवाद यात्रा ने कांग्रेस के अंदर संगठनात्मक समन्वय के सवाल को चर्चा में ला दिया है।
कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने इससे पहले 1 अक्टूबर को रावत को पत्र लिखकर यात्रा पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि कार्यक्रम को लेकर न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई थी। सैलजा ने विधानसभा चुनाव नजदीक होने का हवाला देते हुए पार्टी के सामने एकजुट चेहरा पेश करने की जरूरत बताई थी।
पार्टी नेतृत्व की आपत्ति के बाद भी रावत ने सोमवार को यात्रा जारी रखी। जसपुर से शुरू हुई यात्रा के दौरान वह काशीपुर और रामनगर समेत विभिन्न स्थानों पर पहुंचे। रावत ने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर जनता के बीच सक्रिय रहने की अपील की।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच केसी वेणुगोपाल और हरीश रावत की मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वेणुगोपाल ने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि चुनावी अभियान पार्टी के सामूहिक नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे के तहत ही आगे बढ़ाया जाएगा।
कांग्रेस नेतृत्व का संदेश है कि उत्तराखंड के सभी नेताओं को साथ लेकर चुनावी अभियान चलाया जाएगा। पार्टी किसी एक नेता के अलग अभियान के बजाय साझा रणनीति पर जोर दे रही है। वेणुगोपाल ने खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीति के अनुरूप ही प्रदेश में कार्यक्रम आगे बढ़ेंगे।
वहीं हरीश रावत अपनी यात्रा को जनसंपर्क अभियान के रूप में पेश कर रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि इससे कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में मदद मिलेगी। पार्टी नेतृत्व की चिंता हालांकि संगठनात्मक अनुशासन और साझा चुनावी संदेश को लेकर है। दोनों पक्षों के इन अलग-अलग नजरियों के बीच अब केंद्रीय नेतृत्व ने सामूहिक अभियान पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने चुनावी रणनीति तैयार करने के साथ प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की चुनौती भी है। केसी वेणुगोपाल की हरीश रावत से मुलाकात और उसके बाद जारी बयान से साफ है कि केंद्रीय नेतृत्व आगामी चुनाव में अलग-अलग कार्यक्रमों के बजाय सभी नेताओं को एक मंच पर लाकर संयुक्त अभियान चलाने पर जोर दे रहा है।