Congress ने लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियान पर मोदी की चुप्पी पर किया हमला
New Delhi नई दिल्ली : कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि वे लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियानों पर "पूरी तरह से चुप" हैं और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद कोई बयान नहीं दे रहे हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिंता व्यक्त की।
रमेश ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी भी जारी है। उनका कहना था कि यह वार्ता भारत के हितों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक सफल यूएस-ईरान समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने में मदद कर सकता है और वैश्विक तेल की कीमतों पर दबाव कम कर सकता है, जिससे भारत को सीधे लाभ होगा।
उन्होंने आगे बताया कि लेबनान में इज़राइल के निरंतर सैन्य अभियान के कारण वार्ता में बाधा उत्पन्न हुई है। रमेश के अनुसार, इस सैन्य अभियान ने लेबनान में दशकों में सबसे गहरी घुसपैठ की स्थिति पैदा की है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भारत को एक स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और संवेदनशील क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक भूमिका को प्रभावी रूप से निभाना चाहिए।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि भारत को न केवल अपने आर्थिक और ऊर्जा हितों के लिए, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय मामलों में सक्रिय और स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। जयराम रमेश ने जोर देकर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुप्पी बनाए रखना भारत के वैश्विक छवि और रणनीतिक हितों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए यह समय संवेदनशील है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का आयात सीधे प्रभावित हो सकता है। लेबनान में चल रही हिंसा और इज़राइल के सैन्य अभियान के बीच भारत का स्पष्ट रुख, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से मांग की कि वे इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट बयान दें और भारत की भूमिका को सकारात्मक रूप से प्रदर्शित करें। पार्टी ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय तनाव और सैन्य कार्रवाइयों का असर न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक तेल की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मची है और विपक्षी दल प्रधानमंत्री से स्पष्ट प्रतिक्रिया की मांग कर रहे हैं। जयराम रमेश ने कहा कि मौजूदा समय में भारत को संवेदनशील कूटनीतिक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि देश के आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक हित सुरक्षित रहें।